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उद्योग व माइनिंग को भूजल पुनर्भरण के देने होंगे सालाना १५ से ३० लाख रुपए

चेम्बर ने की शुल्क वापस लेने की मांग, जलशक्ति मंत्री को लिखा पत्र
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भीलवाड़ा

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Suresh Jain

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Updated: 28 Oct 2020, 10:22 PM IST

30 lakh rupees will have to be paid annually for ground water recharge in bhilwara

30 lakh rupees will have to be paid annually for ground water recharge in bhilwara

भीलवाड़ा।
जलशक्ति मंत्रालय ने नदी विकास एवं गंगा पुर्नजीवन के नाम पर उद्योग, माइनिंग व वाणिज्यिक उपयोग के लिए 10 क्यूबिक मीटर प्रतिदिन से अधिक जल का उपयोग करने पर पुनर्भरण शुल्क लगा दिया। उद्योगों पर यह शुल्क 10 रुपए प्रति हजार लीटर से लगाया है। इस हिसाब से भीलवाड़ा के टेक्सटाइल, माइनिंग व अन्य उद्योगों को सालाना 15 से 30 लाख रुपए शुल्क देना होगा। साथ ही भूजल निकासी वाले उद्योगों से सक्षम ऑडिटर से इम्पेक्ट एसेसमेन्ट रिपोर्ट भी देनी होगी। इससे सकते में आए भीलवाड़ा के टेक्सटाइल उद्योग ने शुल्क नियम वापस लेने की मांग की।
टेक्सटाइल या अन्य उद्योगों के लिए सरकार सतही या नदी का जल उपलब्ध नहीं कराया जाता है। अभी एनओसी लेकर भूजल उपयोग के अलावा और विकल्प भी नही है। ऐसे भी भूजल कठोर होता है एवं इसे उपयोग लेने योग्य बनाने में भी उद्योगों में आरओ लगा रखे हैं। इससे पानी का खर्च बढ़ जाता है। उद्योग अपने निकले पानी का शुद्धीकरण कर पुनर्उपयोग करते हैं। सभी उद्योगों में वर्षा जल संचय के इंतजाम कर रखे हैं। इससे भूजल का पुर्नभरण होता है। उद्योगों को पुनर्भरण उपायों के लिए भूजल उपयोग में 50 प्रतिशत की छूट है। उद्योग को भूजल निकासी के लिए हाइड्रोजियोलोजिकल रिपोर्ट देनी होती है। उस आधार पर ही एनओसी मिलती है। ऐसे में इम्पेक्ट एसेसमेन्ट रिपोर्ट देने का प्रावधान भी उद्योगों के लिए कठिन है।
मेवाड़ चेम्बर के महासचिव आरके जैन ने केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत को प्रतिवेदन भेजा। इसमें उद्योगों एवं माइनिंग पर भूजल पुनर्भरण शुल्क एवं भूजल निकासी पर इम्पेक्ट एसेसमेन्ट रिपोर्ट दाखिल करने का नियम वापस लेने की मांग की। भूजल उपयोग में ५० प्रतिशत की छूट को बढ़ाकर 80 प्रतिशत करने की मांग भी की।