
आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) जयपुर ने चार करोड़ रुपए की हवाला राशि को टेरर फंडिंग का नहीं माना है। एटीएस ने अपनी जांच में माना है कि यह राशि किसी आंतकवाद के नाम न आकर केवल हवाला राशि है।
भीलवाड़ा।
आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) जयपुर ने चार करोड़ रुपए की हवाला राशि को टेरर फंडिंग का नहीं माना है। एटीएस ने अपनी जांच में माना है कि यह राशि किसी आंतकवाद के नाम न आकर केवल हवाला राशि है। अब इस मामले को पूरी तरह से आयकर विभाग को सौंप दिया गया है। आयकर विभाग अब अपने स्तर पर इसकी जांच कर रहा है। आयकर अधिकारी भी चना-दाल के होलसेल व्यापारी दीपक समथानी के बयान लेकर शुक्रवार सुबह जयपुर लौट गए हैं।
एटीएस के पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने बताया कि अब तक हुई जांच में यह मामला केवल हवाला का सामने आया है। भीलवाड़ा आई आयकर विभाग की टीम ने अपनी जांच शुक्रवार को पूरी कर ली है। टीम के सभी सदस्य भीलवाड़ा से रवाना हो गए। आयकर अधिकारियों ने बताया कि चना दाल के व्यापारी दीपक के गुरुवार शाम लौटने के बाद उसके बयान दर्ज किए। दीपक ने अपने बयान में कई चौंकाने वाले नामों का खुलासा किया। उसने यह भी स्वीकार किया है कि जो राशि भीलवाड़ा आ रही थी। उसमें से कुछ राशि उसके पास आनी थी, जिसे अहमदाबाद तक पहुंचानी थी।
आयकर विभाग के सभी अधिकारी अपनी जांच पूरी करने के बाद शुक्रवार तड़के रवाना हो गए। हालांकि हुसैन कॉलोनी स्थित कांग्रेस पार्षद फजले रऊफ उर्फ लुफ्ती के मकान को सील किया गया है, जिसे लुफ्ती के आने के बाद ही खोला जाएगा। सूत्रों का कहना है कि टीम को दीपक की दुकान तथा उसके मकान से कोई विशेष कागजात नहीं मिले हैं। जबकि लुफ्ती के फरार होने से कुछ भी सामने नहीं आ सका है। पार्षद लुत्फी के सीज मकानों के बाहर पुलिसकर्मी तैनात हो गए है।
गौरतलब है कि आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) जयपुर व आयकर विभाग की संयुक्त कार्रवाई में चार करोड़ की हवाला राशि समेत भीलवाड़ा के बनवारी लाल मिश्रा को बुधवार व गुरुवार की रात को पकड़ा था। मिश्रा पार्षद का नौकर है। भीलवाड़ा के दोनों हवाला कारोबारी गुरुवार तड़के ही फरार हो गए। भीलवाड़ा में पहली बार हवाला राशि को लेकर हुई कार्रवाई हुई है।
सौ से पांच सौ रुपए तक का कमीशन
हवाला राशि को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाने के लिए एजेन्ट कमीशन लेते हैं। यह कमीशन एक लाख पर सौ रुपए से लेकर पांच सौ रुपए लिए जाते हैं। एक दिन में करोड़ों रुपए का लेन-देन हवाला में होता है। ऐसे में कुछ लोग यही काम करते हैं। भीलवाड़ा में करीब दो दर्जन से अधिक बड़े व्यापारी इस काम में लगे हैं। इसका खुलासा नोटबंदी के दौरान भी कुछ लोगों ने गुमनाम पत्र आयकर विभाग के लिखकर किया था।
Published on:
30 Mar 2018 11:27 pm
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