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एक हजार लोगों पर 40 श्वान, एक के बधियाकरण पर 1200 का खर्च

- करोड़ों का खर्चा देख नगरीय निकायों ने हाथ खींचे- गली-मोहल्ले में आतंक, सड़कों पर उत्पात

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एक हजार लोगों पर 40 श्वान, एक के बधियाकरण पर 1200 का खर्च

एक हजार लोगों पर 40 श्वान, एक के बधियाकरण पर 1200 का खर्च

जयप्रकाश सिंह
भीलवाड़ा। सुनने में भले ही अचरजकारी लगे, लेकिन विशेषज्ञों की माने तो प्रदेश के शहरों में एक हजार की आबादी पर 30 से लेकर 40 तक आवारा श्वान है। ये श्वान दिन रात गली, मोहल्ले और सड़कों पर आतंक और उत्पात मचा रहे हैं। एनीमल बर्थ कंट्रोल रूल्स 2001 की पालना में एक श्वान के बधियाकरण का खर्च लगभग 1200 रूपए पड़ रहा है, ऐसे में करोड़ों रूपए का खर्चा देखकर प्रदेश के ज्यादातर नगरीय निकायों ने इस कार्य से हाथ खींच लिए हैं। भीलवाडा़ शहर की आबादी चार लाख है। नगरपरिषद ने यहां श्वानों की संख्या 40 हजार आंकी है। इनके बधियाकरण पर 5 करोड़ का खर्चा देखकर परिषद अब राज्य सरकार से बजट मांगने जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार शहरी क्षेत्र में एक-एक श्वान की गिनती मुश्किल है, लेकिन जनसंख्या घनत्व और जमीन के क्षेत्रफल के आधार पर इनका आकलन किया जाता है। बड़े शहरों में 32 लोगों पर एक तथा मध्यम और छोटे शहरों में 24 लोगों पर एक श्वान माना जाता है। ऐसे में शहरी क्षेत्र में एक हजार की आबादी पर इनकी 30 से 40 तक है। स्वायत्त शासन निदेशालय [डीएलबी] ने 2016 में बधियाकरण की दर प्रति श्वान 1200 रूपए तय कर रखी है। इस राशि में श्वान पकड़ने से लेकर ऑपरेशन के बाद उसी जगह पर छोड़ने तक का सारा कार्य संबधित संस्था को करना है।
न गली बदलेंगे, न ही चिमटे से पकड़ेंगे
पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की पालना में आवारा श्वानों को पकड़ते समय क्रूरता नहीं की जा सकती। ऐसे में उन्हें पकड़ने और बधियाकरण के लिए कई तरह सावचेती बरतनी होती है। उन्हें चिमटे के बजाय जाली लगे उपकरण से पकड़ा जाता है। यह विशेष उपकरण भी गुजरात से आता है। पकड़े जाने के बाद उसके गले में एक पट्टा डाला जाता है, जिस पर उसकी गली और मोहल्ले के नाम से कोडिंग होती है। इसके बाद उन्हें विशेष रूप से बनाए गए शेल्टर में रखा जाता है। यहां उसके साथ मोहल्ले के ही अन्य श्वान भी रखे जाते है, ताकि वह स्ट्रेस में नहीं रहे। रात को उसे भोजन और पानी नहीं दिया जाता। सुबह शेल्टर में ही बने ऑपरेशन थिएटर में बेहोशी की दवा देकर उनका बधियाकरण किया जाता है।
मादा और नर दोनों का बधियाकरण
शेल्टर में मादा और नर दोनों तरह के श्वान का बधियाकरण होता है। मादा का गर्भाशय और बच्चेदानी और नर के अंडकोष निकाले जाते हैं। उन्हें ऑपरेशन के बाद ठीक होने में 3 से 5 दिन का समय लगता है। ठीक होने के बाद इन श्वानों को कान के पास परमानेंट मार्किं ग करके उसी गली में छोड़ा जाता है, जहां से उसे पकड़ा गया था। छोड़ने से पहले उन्हें एंटी रेबीज टीका भी लगाया जाता है।
एक दिन में बीस से तीस सर्जरी
शेल्टर होम में एक दिन में पशु चिकित्सक 20 से 30 श्वानों की सर्जरी कर पाता है। शेल्टर होम में गली में एक साथ पकड़े गए सभी श्वानों को ऑपरेशन से पहले और बाद में भी साथ ही रखा जाता है, ताकि वे आपस में मिलजुलकर रहे। दूसरे इलाके के श्वान साथ रहने पर उनमें झगड़ा बढ़ जाता है।
'' हमनें श्वानों के बधियाकरण के लिए एक संस्था से बात की है। शहर में 40 हजार श्वान होने का अनुमान है। इनके बधियाकरण पर करीब 5 करोड़ रूपए खर्च होंगे। इस सम्बन्ध में बजट के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भिजवाया जाएगा।
- राकेश पाठक, सभापति नगर परिषद, भीलवाड़ा
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'' प्रदेश में सर्वोच्च न्यायालय और एनीमल बर्थ कंट्रोल [एबीसी] रूल्स 2001 की पालना नहीं हो रही है। नियमानुसार बधियाकरण नहीं होने से हर जिले में हजारों आवारा श्वान इधर उधर घूम रहे हैं। मानसिक संतुलन खराब होने से अनेक श्वान इंसानों के लिए खतरनाक हो रहे हैं। राज्य सरकार सभी नगरीय निकायों को इनके बधियाकरण के लिए पाबंद करें।- बाबूलाल जाजू, प्रदेश प्रभारी पीपुल्स फॉर एनीमल
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'' आवारा श्वानों के साथ क्रूरता नहीं की जा सकती। ऐसे में उन्हें पकड़कर बधियाकरण के बाद वापिस पुराने जगह पर छोड़ने के लिए कई तरह की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। कई तरह के विशेष संसाधन जुटाने पड़ते हैं।- डा.नवीश नेहरा, संस्थापक संतुलन जीव कल्याण, जयपुर
भीलवाड़ा जिले में श्वानके काटने से पीडि़त
वर्ष अस्पताल पहुंचे
2016 1041
2017 1243
2018 1742
2019 1379
2020 1240
2021 820