कहां से आता है पैसा
- छात्र संगठनों से टिकट मिलने के बाद प्रत्याशियों के साथ छात्र संगठन भी चंदा उगाही करते हैं।
- फण्ड की पहली व्यवस्था राजनीतिक स्तर से होती है। पार्टी नेता चुनावी खर्च की व्यवस्था करते हैं।
- सांसद और विधायक भी करते हैं प्रत्याशियों की आर्थिक मदद।
- फण्ड की व्यवस्था पार्टी से जुड़े उद्यमी करते हैं।
- जिस समाज का प्रत्याशी है, वह समाज भी चंदा देता है।
- प्रत्याशी के रिश्तेदार, मित्र व घर से चंदे की व्यवस्था होती है।
----
अध्यक्ष प्रत्याशी यहां खर्च करता है पैसा
- 10 से 15 चौपहिया वाहन जिले में दौड़ते हैं।
- 2 से 3 लाख रुपए गाड़ी के पेट्रोल-डीजल और मरम्मत पर खर्च।
- 2 से 3 लाख रुपए का रसोड़ा। इसमें प्रतिदिन 500 से 1000 छात्र खाना खाते हैं।
- 2 लाख रुपए बैनर, पेम्फलेट, होर्डिंग व अन्य डिजिटल प्रचार सामग्री पर
- लाखों रुपए विज्ञापन पर खर्च करते हैं।
- विभिन्न छात्रावासों में खाना व शराब का खर्च, छात्रावासों में पार्टियां शुरू होती है।
------
कॉलेज नहीं करते निगरानी
कॉलेज में सीनियर प्रोफेसर को मुख्य चुनाव अधिकारी घोषित कर चुनाव निगरानी टीम बनाई जाती है। यह बात और है कि प्रत्याशियों के खर्च की निगरानी कोई नहीं करता है। प्रत्याशी जितने खर्चे का बिल देता है, उतना स्वीकार कर लिया जाता है।