
5000 रुपए तय किया खर्च, कर रहे 100 गुना खर्चा
भीलवाड़ा जिले के कॉलेजों में विद्यार्थियों की नुमाइंदगी के लिए होड़ मची है। छात्रसंघ चुनाव में उतरे प्रत्याशी प्रचार पर जमकर पैसा बहा रहे हैं। तय सीमा से कई सौ गुना अधिक पैसा चुनाव प्रचार पर खर्च होता है। कॉलेज मतदाताओं को लुभाने के लिए छात्रसंघ प्रत्याशी कई तरह के हथकंडे आजमाते हैं। इसमें भोजन कराने से लेकर सैर-सपाटा तक शामिल है। खर्च पर निगरानी का जिम्मा कॉलेज प्रबंधन का है लेकिन छात्र संगठनों के दबाव के आगे ये कुछ कर नहीं पाते।
मालूम हो, छात्रसंघ चुनाव सुधार पर लिंगदोह कमेटी की गाइडलाइन के अनुसार, अध्यक्ष के प्रचार पर अधिकतम खर्च की सीमा पांच हजार रुपए तय है। असलियत में विभिन्न छात्र संगठनों के प्रत्याशी तय सीमा से कई गुना खर्चा कर रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार अध्यक्ष पद का प्रत्याशी 6 से 8 लाख रुपए तक खर्च करता है। एक अध्ययन के मुताबिक वर्ष 2019 में कॉलेज के विभिन्न पदों पर प्रत्याशियों ने लाखों रुपए प्रचार में खर्च किए, लेकिन कॉलेज प्रशासन को जीते प्रत्याशियों ने 5 हजार रुपए से कम खर्चे के बिल पेश किए।
कहां से आता है पैसा
- छात्र संगठनों से टिकट मिलने के बाद प्रत्याशियों के साथ छात्र संगठन भी चंदा उगाही करते हैं।
- फण्ड की पहली व्यवस्था राजनीतिक स्तर से होती है। पार्टी नेता चुनावी खर्च की व्यवस्था करते हैं।
- सांसद और विधायक भी करते हैं प्रत्याशियों की आर्थिक मदद।
- फण्ड की व्यवस्था पार्टी से जुड़े उद्यमी करते हैं।
- जिस समाज का प्रत्याशी है, वह समाज भी चंदा देता है।
- प्रत्याशी के रिश्तेदार, मित्र व घर से चंदे की व्यवस्था होती है।
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अध्यक्ष प्रत्याशी यहां खर्च करता है पैसा
- 10 से 15 चौपहिया वाहन जिले में दौड़ते हैं।
- 2 से 3 लाख रुपए गाड़ी के पेट्रोल-डीजल और मरम्मत पर खर्च।
- 2 से 3 लाख रुपए का रसोड़ा। इसमें प्रतिदिन 500 से 1000 छात्र खाना खाते हैं।
- 2 लाख रुपए बैनर, पेम्फलेट, होर्डिंग व अन्य डिजिटल प्रचार सामग्री पर
- लाखों रुपए विज्ञापन पर खर्च करते हैं।
- विभिन्न छात्रावासों में खाना व शराब का खर्च, छात्रावासों में पार्टियां शुरू होती है।
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कॉलेज नहीं करते निगरानी
कॉलेज में सीनियर प्रोफेसर को मुख्य चुनाव अधिकारी घोषित कर चुनाव निगरानी टीम बनाई जाती है। यह बात और है कि प्रत्याशियों के खर्च की निगरानी कोई नहीं करता है। प्रत्याशी जितने खर्चे का बिल देता है, उतना स्वीकार कर लिया जाता है।
Published on:
25 Aug 2022 11:37 am
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