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कीट के अभाव में 70 लाख की ऑटो मेटिक आरएनए एक्सट्रैक्शन मशीन बैकार

जांच में नहीं आ पा रही तेजी, कर्मचारियों को मैन्यूल ही करना पड़ रहा काम

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70 million extraction machine backer in the absence of insect in bhilwara

70 million extraction machine backer in the absence of insect in bhilwara

भीलवाड़ा।
मेडिकल कॉलेज में संचालित कोरोना लैब में स्थापित 70 लाख की ऑटो मेटिक आरएनए एक्सट्रैक्शन मशीन कीट के अभाव में बैकार पड़ी है। इसके कारण जांच रिपोर्ट आने में भी देरी आ रही है। वही लैब में लगे कर्मचारियों को आरएनए को अलग करने के लिए मैन्यूल ही काम करना पड़ रहा है। इससे कर्मचारियों को भी हर समय खतरा बना रहता है। बताया गया है कि किट अलग-अलग तरीके से आने से मशीन स्वीकार नहीं कर पा रही है। ऐसे में मशीन के माध्यम से आरएनए अलग करने का काम नहीं हो रहा है।
क्या है ऑटो मेटिक आरएनए एक्सट्रैक्शन मशीन
लैब में स्थापित 70 लाख की मशीन मई माह में आ गई थी। इसे 9 मई को शुरू कर दिया गया था। इस मशीन के माध्यम से सैंपल से आरएनए को अलग किया जाता है। जो पहले सैम्पल को मैन्युएल अलग-अलग करने का काम किया जा था। इसके कारण डाक्टर व लैब टेक्नीशियन दहशत में थे। यह मशीन ऑटोमेटिक होने की वजह से जांच करने वाले डॉक्टरों और कर्मचारियों में कोरोना वायरस का खतरा नहीं रहता है। आरएनए एक्सट्रैक्टशन मशीन में इसी कम्पनी के आने वाले जांच कीट के कारण सैम्पलों की जांच तेजी से होती है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से कुछ कीट अलग-अलग कम्पनी से मंगवाए जा रहे है। इससे लैब में कार्यरत डाक्टर व कर्मचारी सही तरीके से जांच भी नहीं कर पा रहे है। क्योंकि अलग-अलग कम्पनी के कीट को मशीन आसानी से स्वीकार नहीं कर पा रही है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इसके टैण्डर भी जारी किए है। जो अगले कुछ दिनों में खोले जाएंगे।
एक हजार की हो रही जांच
प्रतिदिन लैब में १००० से १२०० सेम्पलों की जांच हो रही है। जबकि सरकार का दबाव है कि जांच की रफ्तार दो से तीन गुनी की जाए। लेकिन यह रफ्तार बिना कीट के संभव नहीं है। कीट आने के बाद जांच में तीन गुना तक तेजी आने की संभावना है।
कीट के लिए किए टैण्डर
यह सही है कि ऑटो मेटिक आरएनए एक्सट्रैक्शन मशीन के किट नहीं होने से जांच में तेजी नहीं आ रही है। किट के लिए मेरे आने से पहले ही टैण्डर कर दिए थे। टैण्डर होने के बाद कीट आने की संभावना है। फिलहांल प्रदेश में कीट की भी कमी चल रही है।
डॉ. शलभ शर्मा, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज भीलवाड़ा