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भीलवाड़ा

9 दिवसीय सिद्धचक्र महामण्डल विधान का रथयात्रा के साथ समापन

भीलवाड़ा . आर के कॉलोनी स्थित श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में मुनि संबुद्ध सागर व संविज्ञ सागर के सानिध्य में चल रहे 9 दिवसीय सिद्धचक्र महामण्डल विधान पूजन का समापन रथ यात्रा के साथ हुआ।

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भीलवाड़ा . आर के कॉलोनी स्थित श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में मुनि संबुद्ध सागर व संविज्ञ सागर के सानिध्य में चल रहे 9 दिवसीय सिद्धचक्र महामण्डल विधान पूजन का समापन रथ यात्रा के साथ हुआ। रथ यात्रा के बाद महेन्द्र कुमार विपिन कुमार सेठी ने आदिनाथ भगवान की प्रतिमा को जयकारों के साथ पुनः वेदी में विराजमान किया।

 

ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेश गोधा ने बताया कि 9 दिवसीय सिद्धचक्र महामण्डल विधान में 2040 श्रीफल चढ़ाए गए। प्रतिष्ठाचार्य देवेन्द्र शास्त्री के निर्देशन में विश्व शांति महायज्ञ किया गया। सौधर्म इन्द्र निर्मल सुलोचना सोनी, कुबेर इन्द्र महावीर काला, महायज्ञ नायक मिश्रीलाल अग्रवाल, यज्ञनायक महावीर सेठी ने मुख्य तीन कुण्डों पर 540 आहुतियां दी। अन्य श्रावक-श्राविकाओं ने 51 कुण्डों पर आहुतियां दी। महायज्ञ के समापन के बाद बैंड बाजों के साथ श्रीजी का रथ यात्रा निकाली गई। यह यात्रा आरके कॉलोनी क्षेत्र में भ्रमण करने के बाद पुन: मंदिर पहुंचकर सम्पन्न हुई। रथयात्रा में शामिल महिलाएं व पुरुष नाचते गाते हुए चल रहे थे। बाद में बधाई गीतों के साथ आदिनाथ भगवान को पुन: वेदी में विराजमान किया। इस दौरान मुनि संबुद्ध सागर महाराज ने सिद्धचक्र महामण्डल विधान के बारे में विस्तार से बताया। मुनि ने सभी पात्रों समेत विधान में बैठने वाले से कहा कि सिद्धचक्र विधान मंडल ऐसा अनुष्ठान है, जो हमारी जीवन के समस्त पाप-ताप और संताप को नष्ट कर देता है। सिद्ध शब्द का अर्थ है कृत्य, चक्र का अर्थ है समूह और मंडल का अर्थ एक प्रकार के वृताकार यंत्र से है। इनमें अनेक प्रकार के मंत्र व बीजाक्षरों की स्थापना की जाती है। इस अवसर पर ट्रस्ट की ओर से प्रतिष्ठाचार्य देवेन्द्र शास्त्री, संगीतकार सौनू एण्ड पार्टी का सम्मान किया गया।