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सिस्टम की ‘जंग’ में धूल फांक रही 2.30 करोड़ की मशीनें

- निदेशालय की सुस्ती: भीलवाड़ा में 'कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर' अधर में - 42 लाख के बजट के लिए अटकी युवाओं की राह

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Machines worth Rs 2.30 crore gather dust in the 'rust' of the system

Machines worth Rs 2.30 crore gather dust in the 'rust' of the system

खाद्य प्रसंस्करण को बढ़ावा देकर किसानों और बेरोजगारों को उद्यमी बनाने का सपना सरकारी फाइलों में कैद होकर रह गया है। भीलवाड़ा कृषि उपज मंडी में बनने वाला 'कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर' (सीआईसी) कृषि विपणन निदेशालय के निदेशक की अनदेखी और बजट की खींचतान की भेंट चढ़ गया है। आलम यह है कि केंद्र सरकार की योजना के तहत मंगवाई गई 2.30 करोड़ रुपए की अत्याधुनिक मशीनें पिछले चार माह से मंडी के कोल्ड स्टोरेज में धूल फांक रही हैं, जबकि इनकी स्थापना के लिए आवश्यक मामूली बजट पर सरकार कुंडली मारकर बैठी है।

डेडलाइन समाप्त, काम शून्य

हैरानी की बात यह है कि केंद्र सरकार ने इस सेंटर को सुचारू करने के लिए 15 जनवरी 2026 तक की अंतिम तिथि निर्धारित की थी। आज यह समय सीमा समाप्त हो गई है। लेकिन धरातल पर बिजली का ट्रांसफार्मर तक नहीं लग सका है। मंडी प्रशासन ने मरम्मत और रखरखाव के लिए 42 लाख रुपए की मांग की थी, इसका प्रस्ताव पिछले चार महीनों से निदेशालय में धूल फांक रहा है।

60 से ज्यादा मशीनें बनीं 'शो-पीस'

मंडी में अक्टूबर 2025 में ही 60 से अधिक छोटी-बड़ी मशीनें पहुंच चुकी थीं। इनमें मक्का दाना प्रोसेसिंग, आंवला प्रोसेसिंग और फूड टेस्टिंग लैब के उपकरण शामिल हैं। यदि यह सेंटर शुरू होता है, तो 10 क्विंटल प्रतिदिन उत्पादन की क्षमता विकसित होगी। किसान अपने उत्पाद का मूल्य संवर्धन कर सकेंगे। बेरोजगार युवा मामूली शुल्क पर अपने ब्रांड के उत्पाद तैयार कर सकेंगे।

प्रदेश का हाल: 8 में से सिर्फ 2 जगह काम पूरा

केंद्र ने प्रदेश के 8 जिलों भीलवाड़ा, उदयपुर, बाड़मेर, जयपुर, अलवर, टोंक, जोधपुर और कोटा के लिए 23 करोड़ का बजट जारी किया था। लेकिन विडंबना देखिए कि केवल कोटा और टोंक में ही काम पूरा हो पाया है। शेष जिलों में या तो काम कछुआ चाल से चल रहा है या भीलवाड़ा की तरह बजट के अभाव में ठप है।

बेरोजगारी दूर करने का था मास्टर प्लान

इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण को बढ़ावा देना था। भीलवाड़ा जैसे मक्का और आंवला बाहुल्य क्षेत्र के लिए यह सेंटर गेमचेंजर साबित हो सकता था। यहां प्रशिक्षण की सुविधा भी मिलनी थी, जिससे जिले के सैकड़ों युवाओं को स्वरोजगार मिलता। लेकिन अब करोड़ों की मशीनें कबाड़ होने की कगार पर हैं।

जल्द बजट मिलने की संभावना

निदेशालय से पत्राचार किया है। मशीनों की स्थापना के लिए सेंटर की मरम्मत और हाई-वोल्टेज विद्युत ट्रांसफार्मर अनिवार्य है। इसके लिए बजट भी मांगा है। निदेशालय में गुरुवार को ही बात हुई है। संभावना है कि जल्द ही बजट मिलेगा। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

मदन लाल, सचिव कृषि उपज मंडी समिति, भीलवाड़ा