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श्रद्धा का सैलाब: जयकारों से गूंजा आदिनाथ मंदिर, मोक्ष मार्ग का दिया संदेश

श्रीसिद्ध चक्र महामण्डल विधान का दूसरा दिन: भक्ति नृत्य के बीच हुई रत्नों की वर्षा भीलवाड़ा शहर के आर के कॉलोनी स्थित आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में चल रहे आठ दिवसीय श्रीसिद्ध चक्र महामंडल विधान के दूसरे दिन बुधवार को आस्था और भक्ति का संगम देखने को मिला। भक्ति नृत्य और देव स्तुति के बीच […]

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A flood of devotion: Adinath temple resounded with chants, gave the message of the path to salvation

A flood of devotion: Adinath temple resounded with chants, gave the message of the path to salvation

श्रीसिद्ध चक्र महामण्डल विधान का दूसरा दिन: भक्ति नृत्य के बीच हुई रत्नों की वर्षा

भीलवाड़ा शहर के आर के कॉलोनी स्थित आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में चल रहे आठ दिवसीय श्रीसिद्ध चक्र महामंडल विधान के दूसरे दिन बुधवार को आस्था और भक्ति का संगम देखने को मिला। भक्ति नृत्य और देव स्तुति के बीच पूरा मंदिर प्रांगण भगवान आदिनाथ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।

बुधवार सुबह विधान की शुरुआत संगीतमय भक्ति के साथ हुई। ललित, अनिता एवं श्रुति शाह परिवार को आदिनाथ भगवान का प्रथम अभिषेक एवं शांतिधारा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस अवसर पर कुबेर की भूमिका निभा रहे संत कुमार पाटनी ने रत्नों की वर्षा कर धार्मिक अनुष्ठान को और अधिक भव्य रूप प्रदान किया।

224 श्रीफल चढ़ाकर किया पापों के नाश का संकल्प

आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट के सचिव अजय बाकलीवाल ने बताया कि पंडित जयकुमार जैन के निर्देशन में विधान के तीसरे, चौथे एवं पांचवें वलय की पूजा विधि-विधान से संपन्न हुई। इस दौरान शुद्ध चेतन, शुद्ध ज्ञान और शुद्ध स्वरूप की विशेष आराधना की गई। श्रावक-श्राविकाओं ने क्रोध, मान, माया और लोभ सहित 108 प्रकार के पाप कर्मों के नाश की कामना करते हुए भगवान के समक्ष 224 अर्घ्य अर्पित किए तथा 224 श्रीफल चढ़ाकर पूजा-अर्चना की।

सिद्ध पद की प्राप्ति ही अंतिम लक्ष्य

पूजन के दौरान सिद्ध प्रभु के त्याग और वैराग्य का स्मरण करते हुए धर्मसभा में संदेश दिया गया कि संसार के सांसारिक फलों तथा चक्रवर्ती जैसे बड़े देव पदों का त्याग कर शुक्ल ध्यान में लीन होना ही मोक्ष का मार्ग है। अपने चारित्र को उज्ज्वल बनाकर ही आत्मा अपने अंतिम लक्ष्य सिद्ध पद को प्राप्त कर सकती है। इस महामंडल विधान में शहर के सैकड़ों श्रावक-श्राविकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रमुख रूप से ज्ञानचंद पाटनी, महावीर झांझरी, मिश्रीलाल अग्रवाल, महावीर सेठी, पूनम कोठारी, इंद्रा देवी छाबड़ा, कमला सेठी और शकुंतला कासलीवाल सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।