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भीतरी शक्ति को जगाने का महाअनुष्ठान: मंत्रों की गूंज से ‘मंत्रमुग्ध’ हुआ शहर

‘शक्ति आपके बाहर नहीं, बल्कि आपके भीतर है। आप उसे बाहर खोजते हैं, इसीलिए असफल हो जाते हैं।’ इन ओजस्वी शब्दों के साथ मुनि आदित्य सागर ने बुधवार अलसुबह शहरवासियों को अंतर्यात्रा पर निकलने का मार्ग दिखाया। आरसी व्यास कॉलोनी स्थित शिवाजी गार्डन मार्ग पर जैसे ही सुबह 5:15 बजे मंत्रों की अनुगूंज शुरू हुई, […]

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A grand ritual to awaken inner power: The city was 'enchanted' by the resonance of mantras.

A grand ritual to awaken inner power: The city was 'enchanted' by the resonance of mantras.

'शक्ति आपके बाहर नहीं, बल्कि आपके भीतर है। आप उसे बाहर खोजते हैं, इसीलिए असफल हो जाते हैं।' इन ओजस्वी शब्दों के साथ मुनि आदित्य सागर ने बुधवार अलसुबह शहरवासियों को अंतर्यात्रा पर निकलने का मार्ग दिखाया। आरसी व्यास कॉलोनी स्थित शिवाजी गार्डन मार्ग पर जैसे ही सुबह 5:15 बजे मंत्रों की अनुगूंज शुरू हुई, पूरा वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर हो गया।

तीन दिवसीय 'मंत्राक्ष ध्यान शिविर' के पहले दिन करीब 1200 से अधिक श्रावकों ने हिस्सा लिया। शिविर का प्रारंभ 'ऊं' और 'णमोकार मंत्र' के माध्यम से 'मंत्र स्नान' की प्रक्रिया से हुआ।

तीन बीजाक्षरों से मिली 'अनंत ऊर्जा'

पहले दिन मुनि ने तीन प्रमुख बीजाक्षरों का ज्ञान देते हुए उनके उच्चारण का महत्व समझाया। करीब 45 मिनट तक चले इस सत्र में सन्नाटा ऐसा था कि केवल मंत्रों के कंपन ही महसूस किए जा रहे थे।

बीमारियों का 'मंत्र समाधान'

शिविर के उपरांत 6 से 7 बजे तक जिज्ञासु श्रावकों ने अपनी असाध्य बीमारियों को लेकर मुनि से समाधान के लिए प्रश्न किए। मुनि ने बताया कि कैसे विशिष्ट रंगों और मंत्रों के संयोजन से शारीरिक व्याधियों को ठीक किया जा सकता है। मुनि ने कहा कि आपकी सांसें ही तय करती हैं कि आपको कितना और कैसे जीना है।

खास बातें: जो शिविर को बनाती हैं विशेष

  • वैज्ञानिक आधार: मंत्र जाप से शरीर की 'रिलैक्सेशन रिस्पाॅंस' सक्रिय होती है।
  • अनिद्रा से मुक्ति: शांत मन और गहरी श्वास प्रक्रिया से नींद की गुणवत्ता में सुधार।
  • अनुशासन: कड़ाके की ठंड के बावजूद अलसुबह 5:15 बजे श्रावकों का भारी हुजूम।

सुबह चार बजे से आने लगे लोग

शिविर में पहले आओ पहले स्थान पाओं के आधार पर कई महिलाएं व पुरुष सुबह चार बजे आकर ही पांडल में बैठ गए थे। हालांकि कुछ लोग सफेद कपड़े में न आने पर उन्हें हाथों -हाथ ही सफेद टी शर्ट मौके पर ही दिया गया था। रंग बिरगी रोशनी से पांडल सजाया गया था।

क्या कहना हो श्रावकों का

  • शिविर में जहाजपुर से हिस्सा लेने आई हर्षिता जैन ने बताया कि आज का अनुभव मेरी कल्पना से बिल्कुल अलग था।
  • मनोज कुमार का कहना है कि मंत्रों की शक्ति के बारे में जानना सुखद रहा। पहले ही दिन मुझे अपने भीतर एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार महसूस हुआ।
  • मुकेश पाटोदी का कहना है कि मुनि आदित्य सागर ने जिस तरह से आत्म-अनुशासन और श्वास के संतुलन के बारे में बताया, वह बहुत लाभकारी है। बिजाक्षर सही शब्द क्या हैं बताएं