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शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम: प्रदेश के 300 भवनविहीन और जर्जर स्कूलों को मिलेंगे नए भवन, 450 करोड़ रुपए मंजूर

राज्य सरकार ने शिक्षा के ढांचे को मजबूत करने और बजट 2026-27 की घोषणाओं को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। प्रदेश के ऐसे सरकारी स्कूल जिनके पास खुद का भवन नहीं है या जो जर्जर और खस्ताहाल इमारतों में संचालित हो रहे हैं, उनकी अब सूरत बदलने वाली है। सरकार ने इसके लिए 450 […]

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300 dilapidated and building-less schools in the state will get new buildings, Rs 450 crore approved.

300 dilapidated and building-less schools in the state will get new buildings, Rs 450 crore approved.

  • 7 दिन में मांगे गए प्रस्ताव
  • दूसरे गांवों और निजी भवनों में चल रहे 1443 स्कूलों पर रहेगा खास फोकस
  • जमीन विवाद मुक्त होने पर ही मिलेगी स्वीकृति

राज्य सरकार ने शिक्षा के ढांचे को मजबूत करने और बजट 2026-27 की घोषणाओं को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। प्रदेश के ऐसे सरकारी स्कूल जिनके पास खुद का भवन नहीं है या जो जर्जर और खस्ताहाल इमारतों में संचालित हो रहे हैं, उनकी अब सूरत बदलने वाली है। सरकार ने इसके लिए 450 करोड़ रुपए का बड़ा बजट तय किया है। इससे प्रदेश के 300 भवन विहीन और जर्जर स्कूलों के लिए नए और आधुनिक भवनों का निर्माण किया जाएगा।

इस संबंध में राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद् (समग्र शिक्षा) की राज्य परियोजना निदेशक और स्कूल शिक्षा आयुक्त अनुपमा जोरवाल ने निर्देश जारी किए हैं। सभी मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों और जिला परियोजना समन्वयकों को आदेश दिए गए हैं कि वे महज 7 दिन के भीतर नवीन भवन निर्माण के प्रस्ताव तय प्रपत्र में मुख्यालय भिजवाएं।

इन स्कूलों को मिलेगी प्राथमिकता

जिला कलक्टर की अध्यक्षता में गठित तकनीकी समिति ने प्रदेश भर में जर्जर स्कूल भवनों को चिन्हित किया है। निदेशालय के आदेशों के तहत शिफ्ट किए गए इन स्कूलों को नए भवन के प्रस्तावों में शामिल किया जाएगा। 209 उच्च माध्यमिक विद्यालय ये वे स्कूल हैं जिनके भवन जर्जर होने के कारण इन्हें दूसरे गांवों में शिफ्ट करना पड़ा था। 1234 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय ऐसे हैं जो फिलहाल अपने भवन के अभाव में अन्य सरकारी, निजी या सार्वजनिक भवनों में शरण लिए हुए हैं।

शर्त: जमीन निर्विवादित और पर्याप्त होनी चाहिए

आयुक्त अनुपमा जोरवाल ने स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं स्कूलों के प्रस्ताव स्वीकार किए जाएंगे जिनके पास नए भवन निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि उपलब्ध हो। सबसे अहम शर्त यह है कि प्रस्तावित भूमि पूरी तरह से निर्विवादित होनी चाहिए। अधिकारियों को प्रस्ताव भेजने से पहले इस भूमि की उपलब्धता और आवश्यकता का मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन करना अनिवार्य होगा।

सरकार की मंशा

इस कदम से उन हजारों विद्यार्थियों को राहत मिलेगी जो बारिश या खराब मौसम में टपकती छतों या दूसरे गांवों में जाकर पढ़ाई करने को मजबूर थे। शिक्षा विभाग की इस त्वरित कार्रवाई से उम्मीद जताई जा रही है कि नए सत्र से पहले भवन निर्माण की प्रक्रिया तेज गति से शुरू हो सकेगी।