
Gross negligence: The poor are being made scapegoats to protect the influential.
सुरेश जैन
भीलवाड़ा जिले के बिजौलियां क्षेत्र में अवैध खनन का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां पुलिस और रसूखदारों की मिलीभगत ने कानून का मजाक बना दिया है। आरोप है कि लाखों रुपए के अवैध सैंड स्टोन खनन मामले में मुख्य अभियुक्तों को बचाने के लिए पुलिस गरीब और बेसहारा अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति को फर्जी तरीके से मुल्जिम बना रही है। इस मामले में अब पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र यादव से सीआईडी-सीबी से जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है।
खनिज विभाग के अनुसार 25 जनवरी 2024 को राजस्व ग्राम तिलस्वां की आराजी संख्या 3 बिलानाम भूमि पर अवैध खनन के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई की गई थी। मौके पर करीब 30 गुना 30 गुना 1.5 घन मीटर का अवैध खनन क्षेत्र पाया गया। इसकी पेनल्टी राशि 29.68 लाख रुपए आंकी गई थी। खनिज विभाग की ओर से दर्ज कराई गई एफआईआर संख्या 32/2024 में स्पष्ट रूप से शिवलाल धाकड़ और नानालालाल धाकड़ को मुख्य आरोपी बनाया गया था। जांच टीम में उपखंड अधिकारी बिजौलियां, तहसीलदार बिजौलियां, गिरदावर, पटवारी, अधीक्षण खनिज अभियंता विजिलेंस, खनिज अभियंता बिजौलिया के अधिकारी शामिल थे। यह अभियान जिला कलक्टर के निर्देश पर चलाया था।
शिकायत में सुनील कुमार धाकड़ ने कई चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। इसमें मुख्य आरोपी शिवलाल और नानालाल कथित तौर पर राजनीतिक संरक्षण और धनबल का उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें बचाया जा रहा है। पुलिस के बिचौलियों और दलालों के माध्यम से असली दोषियों को बाहर निकाल कर उनकी जगह गरीब आदिवासियों को पकड़ रहे हैं। जिनके घर में खाने का दाना तक नहीं है। शिकायतकर्ता आरोप है कि जांच अधिकारी राजेश कुमार मीणा तथ्यों के साथ छेड़छाड़ कर निर्दोष आदिवासियों को अवैध खननकर्ता बताकर कोर्ट में चालान पेश कर रहे हैं।
बिजौलियां क्षेत्र के लोगों ने इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच सीआईडी-सीबी से करवाने की मांग की है। पुलिस अधीक्षक को लिखे गए पत्र में सवाल उठाया गया है कि जब बड़े अधिकारियों की मौजूदगी में पंचनामा बना और नामजद रिपोर्ट हुई, तो फिर जांच के दौरान मुल्जिम कैसे बदल दिए गए। क्या उच्च अधिकारियों की आंखों पर पट्टी बंधी है या फिर अवैध कमाई का हिस्सा ऊपर तक जा रहा है। शिकायतकर्ता सुनील कुमार धाकड़ का आरोप है कि दोनो आरोपी एक नहीं बल्कि कई जगहों पर अवैध खनन कर रहे है। रसूखदारों को बचाने के लिए गरीब लोगों को मोहरा बनाया जा रहा है, जो सरासर गरीबों के साथ अन्याय है।
एफआईआर संख्या 32/2024 मेरे से पहले का है। लेकिन यह मामला लंबित नहीं है। शिकायतकर्ता को बुलाया था, लेकिन वह नहीं आया। इस मामले की पूरी जानकारी लेकर ही बता सकता हूं कि अब किस स्थिति में है।
- स्वागत पण्डया, थानाप्रभारी, बिजौलियां
Published on:
27 Feb 2026 09:23 am
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