
A village in Rajasthan where patriotism is instilled in the minds of children from the moment they are born.
आकाश माथुर/ महावीर पुरी
राजस्थान के भीलवाड़ा जिले की जहाजपुर तहसील को यूं ही “वीर सैनिकों की भूमि” नहीं कहा जाता। यह वह पावन धरा है, जहां की मिट्टी में देशभक्ति रची-बसी है और हर गांव में तिरंगे की शान के लिए जीने-मरने का जज्बा पलता है। यहां के गांवों से निकलकर बड़ी संख्या में जवान भारतीय सेना, अर्धसैनिक बलों और सुरक्षा एजेंसियों में देश की सीमाओं पर तैनात हैं। गाडोली, टीकड़, अमरवासी व लुहारी गांव में हर घर से नौजावान सीमा पर देश की रक्षा कर रहा। यहां जन्म से बच्चों में कूट-कूट कर देशभक्ति की भावना भरी जाती है। इन गांवों के कई सैनिक देश की सेवा करते हुए सीमा पर दुश्मन से लोहा लेकर वीरगति को प्राप्त हो गए। इनकी शहादत को आज भी सलाम किया जाता है। राजस्थान में शेखावटी के बाद जहाजपुर क्षेत्र ऐसा है जहां नब्बे प्रतिशत सैनिक यहां से आते है। इसलिए जहाज़पुर को सैनिकों के गांव के नाम से भी जाना जाता है।
गांवों में जब भी कोई जवान छुट्टी पर घर आता है, तो पूरा गांव गर्व से उसका स्वागत करता है। स्कूलों में बच्चों को शहीदों और सैनिकों की कहानियां सुनाई जाती हैं, ताकि देशभक्ति की यह परंपरा यूं ही आगे बढ़ती रहे। जहाजपुर तहसील वीरता, बलिदान और राष्ट्रप्रेम की जीवंत पहचान है। यहां हर दिल “भारत माता की जय” के उद्घोष से धड़कता है। यहां वीरांगनाएं और बुजुर्ग वीर सेनानियों की कहानी सुना कर बच्चों को बड़ा करते है। इन गांवों के हर घर से एक या दो सदस्य सेना में भर्ती होकर देश की सेवा कर रहे है।
सरकार ने यहां के शहीदों की याद में स्मारक बनवाने की घोषणा की, लेकिन कई शहीदों की याद में स्मारक नहीं बनवाए। ग्रामीणों ने यादों को जहन में रखने के लिए गांव में अपने खर्चाें पर स्मारक बनवा रखे है।
वर्तमान जहाजपुर क्षेत्र से 662 जवान सीमा पर तैनात है जबकि 400 से अधिक युवा अग्निवीर में भर्ती होकर सेवा दे रहे हैं। यहां के कई युवा सेना में जाने के लिए तैयार हो रहे हैं। इसके लिए सेवानिवृत्ति सैनिक ट्रेनिंग भी दे रहे हैं। सुबह जल्दी उठकर दस किलोमीटर दौड़ लगवाई जाती है।
Updated on:
27 Jan 2026 09:25 am
Published on:
27 Jan 2026 09:24 am
बड़ी खबरें
View Allभीलवाड़ा
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
