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आधुनिकता की होड़ में खो न जाएं आध्यात्मिक मूल्य, युवा पीढ़ी बनाए संतुलन: मुनि प्रणीत सागर

आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में मुनि ससंघ का मंगल प्रवेश, 108 रिद्धि मंत्रों के साथ हुआ अभिषेक

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Spiritual values ​​should not be lost in the race for modernity, the young generation should maintain balance: Muni Praneet Sagar

आधुनिकता की होड़ में खो न जाएं आध्यात्मिक मूल्य, युवा पीढ़ी बनाए संतुलन: मुनि प्रणीत सागर

दिगंबर मुनि प्रणीत सागर ससंघ का मंगलवार सुबह तरण ताल के सामने स्थित आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में मंगल प्रवेश हुआ। मुनि के शहर में आगमन पर जैन समाज में खासा उत्साह देखने को मिला। मंदिर द्वार पर अध्यक्ष नरेश गोधा, सचिव अजय बाकलीवाल, आत्म प्रकाश लुहाड़िया और राजकुमार अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में समाजजनों ने पादपक्षालन कर मुनि संघ की अगवानी की। अगवानी के पश्चात मंदिर में आदिनाथ भगवान के दर्शन किए गए। मुनि के सानिध्य में महेन्द्र विपिन व रांगाश सेठी ने 108 रिद्धि मंत्रों के उच्चारण के साथ अभिषेक एवं शांतिधारा कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

जल की तरह शीतल और पारदर्शी बने जीवन

धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि प्रणीत सागर ने धर्म के गूढ़ मर्म को बेहद सरल शब्दों में स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि धर्म की वास्तविक उपादेयता तभी है, जब व्यक्ति आत्मचिंतन कर अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाएं। मुनि ने जल के गुणों का सुंदर उदाहरण देते हुए कहा कि जल में शीतलता और पारदर्शिता होती है। भगवान का अभिषेक करते समय श्रद्धालुओं के भाव भी ठीक ऐसे ही होने चाहिए कि उनके स्वभाव में भी जल जैसी शीतलता आए और उनका जीवन पूर्णतः पारदर्शी बने।

आधुनिकता और अध्यात्म में संतुलन जरूरी

मुनि ने आज के समय में आधुनिकता और आध्यात्मिकता के बीच चल रहे मानसिक द्वंद्व पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज की नई पीढ़ी सिर्फ आधुनिकता को श्रेष्ठ सिद्ध करने की अंधी दौड़ में लगी है। यदि यही स्थिति निरंतर बनी रही तो भविष्य में आध्यात्मिक मूल्यों का भारी क्षरण हो सकता है। जीवन की सार्थकता के लिए इन दोनों के बीच संतुलन स्थापित करना बेहद आवश्यक है। समाज में कृतज्ञता के भाव को विकसित करने पर जोर देते हुए मुनि प्रणीत सागर ने कहा कि हम जो शांतिपूर्ण जीवन जी रहे हैं और निर्भय होकर धर्मपालन कर रहे हैं, उसके पीछे पुलिस प्रशासन एवं अन्य सेवाभावी वर्गों का महत्वपूर्ण योगदान है। समाज की यह सामूहिक जिम्मेदारी है कि वह ऐसे उपकारकर्ताओं के प्रति सदैव सम्मान और कृतज्ञता का भाव प्रकट करे।

ये रहेगा आगामी कार्यक्रम

धर्मसभा का संचालन खेमराज कोठारी ने किया। उन्होंने बताया कि मुनि के सानिध्य में प्रतिदिन धार्मिक क्रियाएं आयोजित की जाएंगी। सुबह 5:30 से 6 बजे तक जिनालय वंदनाष 71.5 बजे शांतिधारा, 7:30 बजे से 8 बजे तक युवा वर्ग की कक्षा, 8:30 बजे से 9:30 बजे तक प्रवचन, 9:40 बजे आहार चर्या, दोपहर 3 से 4 बजे तक कक्षा एवं 1008 नामों पर चर्चा, 4:30 बजे से 5:15 बजे तक मोटिवेशनल क्लास, शाम 5:30 बजे से 6:15 बजे तक बालक-बालिकाओं की धार्मिक कक्षा तथा प्रतिक्रमण, भक्ति संध्या का आयोजन होगा।