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अपहरणकर्ता के खिलाफ कार्रवाई की बजाए पुलिस ने बनाया समझौते का दबाव

आमजन में विश्वास और अपराधियों में डर का पुलिस का यह नारा शक् करगढ़ थाने पर सटीक नहीं बैठ रहा

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Action against the kidnapper in bhilwara

Action against the kidnapper in bhilwara

अमरगढ़.

आमजन में विश्वास और अपराधियों में डर का पुलिस का यह नारा शक् करगढ़ थाने पर सटीक नहीं बैठ रहा। यहां पुलिस आमजन को धमकाकर अपराधियों से समझाइश करने का ही दबाव बनाती देखी जा रही है। मामला शक्करगढ़ थाने से जुड़े एक गांव का है। यहां तीन युवक एक किशोरी का अपहरण कर ले गए।

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इस आशय की रिपोर्ट लेकर परिजन पुलिस थाने पहुंचे तो थानाधिकारी ने टालमटोल कर रिपोर्ट दर्ज करने से मना कर दिया। जबकि परिजन नामजद रिपोर्ट देकर कार्रवाई की मांग कर रहे थे। पुलिस अधीक्षक को शिकायत पर थाने पर परिवाद लिया गया।जानकारी के अनुसार क्षेत्र में रहने वाली किशोरी को कुछ लोग अगवा कर ले गए। रिपोर्ट देने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई। उसके बाद पुलिस अधीक्षक को शिकायत के बाद 16 मई को मामला दर्ज किया गया।

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उसके बाद पुलिस ने किशोरी को बूंदी से मुक्त करवाया। आरोपितों को भी अपने साथ लेकर आई। पीडि़ता मां के साथ थाने पहुंची। 17 मई रात को पुलिस ने आरोपित पक्ष को सामने बैठा कर समझौते के लिए दबाव डाला। मामला बनते नहीं देख पुलिस ने किशोरी की मां को अगले दिन सुबह वहां से रवाना कर दिया। बीस किलोमीटर चलकर पीडि़ता की मां गांव पहुंची और भाई को जानकारी दी।


पुलिस ने पीडि़ता को भीलवाड़ा पेश किया। भाई ने मिलना चाहा लेकिन हेड कांस्टेबल हरीश कुमार ने पीडि़ता के भाई का फोन नहीं उठाया।18 मई को पीडि़ता को बिना परिजनों को सूचना दिए पुलिस ने अजमेर नारी निकेतन पहुंचा दिया। इस बीच 18 मई को पीडि़ता के भाई ने थाना प्रभारी भागीरथ सिंह को फोन लगा कर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की तो थानाधिकारी ने समझौता कर पैसे ले जाने की बात कही। थानाधिकारी भागीरथ सिंह का कहना है कि नाबालिग लड़की का मामला है। पुलिस नाबालिग को किसी के सुपुर्द नहीं कर सकती है। इसलिए भीलवाड़ा पेश कर नारी निकेतन भेज दिया।