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यश विहार में तीन दशक बाद वर्षीतप पारणा

खमनोर में आचार्य मानजी स्वामी तेला तप पारणा महोत्सव में हजारों श्रावक श्राविकाओं की उपस्थिति में सौभाग्य मुनि ने राजस्थान प्रवर्तनी यश कंवर की शिष्याओं के साथ यश विहार में अक्षय तृतीया पारणा करने की घोषणा की।

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 After three decades in Yash Vihar

After three decades in Yash Vihar

भीलवाड़ा। खमनोर में आचार्य मानजी स्वामी तेला तप पारणा महोत्सव में हजारों श्रावक श्राविकाओं की उपस्थिति में सौभाग्य मुनि ने राजस्थान प्रवर्तनी यश कंवर की शिष्याओं के साथ यश विहार में अक्षय तृतीया पारणा करने की घोषणा की। यश कंवर चैरिटेबल ट्रस्ट महामंत्री प्रदीप मेहता ने बताया कि तीन दशक बाद ऐसा आयोजन होगा। इस घोषणा के साथ ही संत एवं महासती मंडल की सेवा में पहुंचकर ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने विनती शुरू की। अध्यक्ष हिम्मतसिंह गांग, नवरतनमल बम्ब, मानसिंह भंडारी, राम सिंह चौधरी, भूपेंद्र पगारिया, प्रमोद सिंघवी, अमर सिंह डूंगरवाल, सुरेश बम्ब, शांतिलाल खमेसरा, मानमल डांगी, श्याम सिंह चौहान, ज्ञानेंद्र चौधरी आदि मौजूद थे।
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परमात्मा का एक नाम आनंद
वृंदावन धाम सत्यदीप आश्रम के संत सत्यानंद ने कहा कि जीवन का निष्कर्ष आनंद ही है। आनंद स्वतंत्र शब्द है। सुख के विपरीत दुख, जीवन के विपरीत मृत्यु तथा सम्मान के विपरीत अपमान शब्द है लेकिन आनंद के विपरीत संस्कृत साहित्य में कोई शब्द नहीं है। वे शनिवार को रामधाम में श्रद्धालुओं के साथ चर्चा कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि आनंद परमात्मा से प्राप्त होता है या अंतरमन से। चित्त की मौन व शांत अवस्था में आनंद का दर्शन होता है। परमात्मा का नाम आनंद भी है। ध्यान की गहराइयों में प्रवेश से व्यक्ति भूत-भविष्य से मुक्त हो जाता है। रामधाम पहुंचने पर सत्यनारायण सोमाणी, सत्यनारायण नुवाल, अशोक सोमाणी व हेमंत मानसिंहका ने स्वागत किया।