
राष्ट्रसेविका समिति की ओर से आदर्श विद्या मन्दिर में एकत्रीकरण कार्यक्रम आयोजित
भीलवाड़ा।
राष्ट्रसेविका समिति की ओर से शनिवार को आदर्श विद्या मन्दिर में अखिल भारतीय प्रमुख कार्यवाहिका अन्नदानम सीता गायत्री के सानिध्य में एकत्रीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में प्रधानाचार्य व शिक्षिकाओं से लेकर छोटी बालिकाएं सब एक ही कतार में बैठें नजर आई। इस दौरान लगी शाखा में महिला सेविकाओं व बालिकाओं द्वारा विभिन्न खेल खेले गए। वीणा बहन द्वारा संगीत करवाया गया।
सेविकाओं द्वारा नियुद्ध, भूमि वन्दन, पताका योग , व्यायाम योग आदि कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। गृहिणी सेविकाओं द्वारा ताल योग की प्रस्तुति दी गई। ओजस्विता बहन ने वैयक्तिक गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के पश्चात महानगर की दायित्ववान कार्यकर्ताओं की बैठक हुई, जिसमें पूर्ण नियोजित ढंग से कार्य विस्तार पर चर्चा की गई। बैठक में कार्यक्रम में प्रान्त कार्यवाहिका वन्दना वजिरानी, विभाग कार्यवाहिका सुशीला पारीक, जिला कार्यवाहिका विनिता तापडि़या सहित करीब ९० महिला व बाल सेविकाएं मौजूद थी।
अस्सी वर्षों से महिलाओं को आगे लाने का प्रयास कर रही है समिति : गायत्री
भीलवाड़ा. राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय प्रमुख कार्यवाहिका अन्नदानम सीता गायत्री ने कहा कि कुछ समय पहले जो महिलाएं कभी घर से बाहर निकलने में भी हिचकिचाती थी, वे आज समिति के प्रयासों से समाज सेवा के लिए लगातार आगे आ रही है। समिति ने अस्सी वर्षों से महिलाओं को आगे लाने के लिए प्रयास कर राजस्थान में अच्छे माहौल का निर्माण किया है।
गायत्री शनिवार को भीलवाड़ा प्रवास के दौरान पत्रिका से बातचीत कर रही थी। उन्होंने कहा कि समिति का कार्य विस्तार की दृष्टि से पूरे देश में विशेष प्रयास चल रहा है। राजस्थान में भी महिलाआें की संगठन शक्ति बढ़ रही है। समिति द्वारा बालिकाओं व युवतियों के साथ ही महिलाओं को आत्मसुरक्षा के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। युवतियां कराटे जैसे विषय में अभ्यास कर स्वयं को समाज में खड़ा करने की स्थिति का निर्माण कर रही है।
उन्होंने महिलाओं के लिए कहा कि आज महिलाओं को तेजस्वी माता बनकर अपनी बालिकाओं को राष्ट्रीय मूल्यों व जीवन मूल्यों के संरक्षण के काबिल बनाने की जरूरत है। महिलाएं रानी पद्मिनी की तरह अपने सतीत्व की रक्षा के लिए तत्पर रहे। विवाह से पूर्व प्लेन मिरर की तरह और विवाह पश्चात पतिव्रत धर्म का पालन करे। कौशल्या बनकर कुशलता से दाम्पत्य जीवन का निर्वहन करे और बालिकाओं के साथ-साथ पुत्रों को भी संस्कारित करना चाहिए।
Published on:
08 Apr 2018 12:59 pm
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