
Akshay's goal of digital marketing
भीलवाड़ा। वैश्विक कोरोना महामारी में ऑफिस छूटा तो उम्मीदों को झटका लगा, लेकिन वर्क फ्र ॉम होम ने इरादे और मजबूत कर दिए। अब ऐसा लगता है मानो सपने के पंख लगने वाले है। यह कहना है भीलवाड़ा के आर सी व्यास नगर निवासी अक्षय पाटनी का।
पच्चीस वर्षीय कंम्प्यूटर साइंस अक्षय ने भीलवाड़ा के ही स्थानीय निजी स्कूल से कक्षा बारहवीं उतीर्ण की। जयपुर के जयपुर इंजीनियरिंग कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर से पास होने के बाद अक्षय ने कभी पीछे मुड़ के नहीं देखा । आज खुद के स्टार्टअप श्रैंकहोन्य के माध्यम से विश्व की बिग बास्केट,ट्रेल, टरूनेंट, राजोरपे जैसे नामी कंपनियों की व्यवसाय में सहायता करते है। डिजिटल मार्केटिंग के क्षेत्र मे उनकी अपनी अंतर्राष्ट्रीय पहचान है। अक्षय डिजिटल मार्केटिंग क्षेत्र में बड़ी संख्या में युवाओं को कैरियर बनाने में जुटे है।
बैंगलूर से शुरूआत
अक्षय ने अपने स्टार्टअप की शुरूआत बैंगलूर से की और आज उनके दफ्तर मुंबई, संयुक्त अरब अमीरात यूनाइटेड किंगडम में भी है। अक्षय का यह मानना है की बड़ी कंपनी में काम को अधिक प्राथमिकता नही दे, खुद को साबित करनी की कोशिश करनी चाहिए। कोरोना संकट काल में जब देश व विदेश आर्थिक संकट से जुझ रहा था तो उसने खुद का डिजिटल मार्केटिग प्लेटफार्म तैयार किया। उनके डिजिटल प्लेटफार्म रैंकहोन की अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान है। वह बताते है कि वस्त्र व्यवसायी पिता कमलनयन व मां अनिता पाटनी ने उन्हें हर कदम पर प्रोत्साहित किया है।
राह नहीं थी आसान
अक्षय बताते है कि डिजिटल प्लेटफार्म पर रैंकहोन की शुरुआत में उन्हें विभिन मुश्किलों का सामना करना पड़ा खुद का कैरियर बनाने और इसके बाद युवाओं को रोजगार की राह दिखाने के लिए रातों को जागना पड़ा। जल्द ही उन्होंने यहां समझ लिया था की स्टार्टअप की उन्नति के लिए एक अच्छी टीम और छवि होना अनिवार्य है। अपनी छवि और पहचान बनने के लिए उन्होंने कई फ ्री टॉक्स, कांफ्रेंस की। समय के साथ उन्हें एक के बाद बड़े डिजिटल मार्केटिंग के लिए क्लाइंट्स मिले। कंपनी की कामयाबी के लिए वो कहते है की यदि हमें एक चीज़ भी हुनर है तो वह काफी है। शुरुआत मे मुश्किलें आएगी गलती भी होगी मगर वो ही आपको निखरेगी । कोरोना काल में अक्षय ने गृह नगर भीलवाड़ा से ही काम किया और अब तो वर्क फ्रॉम ने उनके काम में और निखार लाया है।
देश के गणतंत्र को करेंगे मजबूत
देश के गणतंत्र को और मजबूत करने के लिए अक्षय ने फैसला लिया कि अब वह अपनी कंपनी के लिए 60 नए कर्मचारी टायर थ्री (महानगर) की श्रेणी यानि भीलवाड़ा शहर से चुनेंगे। वो बताते है कि हमारे भारत देश में गणतंत्र की मजबूत जड़े महानगरों के साथ ही देश के छोटे-छोटे गांवों से जुड़ी है। यहां कच्चे घरों में बड़े सपने पल रहे है।
नहीं टैंलेंट की कमी
वो बताते है कि समय के साथ यह अनुभव हुआ कि छोटे शहरों मै टैलेंट की कोई कमी नहीं है। उनके इस निर्णय से अब कई कर्मचारी को छोटे शहर से बैंगलूर, मुंबई जैसे महानगर जाने की जरुरत नहीं है, अब कई लोग अपने शहर रहे के जीवन मे सफ लता और ज्ञान प्राप्त कर सकते है।
हमें दूर दृष्टि होना चाहिए
अक्षय के जिंदगी के मूल मंत्र है की सफ लता के लिए हमें दूर दृष्टि होना चाहिए। अक्षय बताते है कि बचपन से ही कुछ अलग करने की ललक थी, मम्मी-पापा व बहन सुनैना के साथ ही रिश्तेदारों व दोस्तों ने हर कदम पर प्रोत्साहित कियाए यही कारण है कि कदम डगमगाए मगरए लडखड़ाए नहीं।
Published on:
27 Apr 2021 01:38 pm
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