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पन्नाधाय, मीराबाई, रानी पद्ममावती के बलिदान चित्रों ने किया महिलाओं में जोश का संचार

नारी शक्ति केन्द्र का अखिल भारतीय अभ्यास कार्यक्रम

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नारी शक्ति केन्द्र का अखिल भारतीय अभ्यास कार्यक्रम

भीलवाड़ा ।

धर्मान्तरण रोकने के लिए धर्म का प्रचार करना होगा। यह काम किसी एक पुरुष या महिला का नहीं पूरे समाज का है। समाज के साथ महिलाओं व युवा पीढ़ी को आगे आना होगा। भारत का भविष्य भी युवा है। युवा का निर्माण करने वाली प्रथम गुरु ही मां है। लेकिन महिलाओं के आगे नहीं आने से डर व भय के कारण विदेशियों के द्वारा तैयार किए गए किसी मजहब के नाम पर धर्मान्तरण हो रहा है। इसे रोकना है तो धर्म का प्रचार करें। यह विचार विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय मंत्री धर्मनारायण शर्मा ने शनिवार को अग्रवाल उत्सव भवन में चित्तौडग़ढ़ प्रान्त के विश्व हिन्दू परिषद की ओर से नारी शक्ति मंच के अखिल भारतीय अभ्यास कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए व्यक्त किए।

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शर्मा ने कहा कि आज पाक हमारी छाती पर खड़ा है। उसको सबक सिखाने के लिए महिलाओं को आगे आना होगा। भारत आज तीन भागों में बंटा है। धर्म को बचाने के लिए सभी ने प्रयास किए। निराकार व शाकाहार के कारण धर्म आगे तो बढ़ा लेकिन इसमें गति नहीं आ पाई। अंग्रेज भारत में आए तो धर्मांतरण किया। विदेशी धन लेकर विदेशी धर्म थोपा जा रहा है। यह लोग पिछड़े क्षेत्रों में जा रहे है। वहां महिलाओं व युवाओं को लोभ व लालच देकर उनका धर्मपरिवर्तन कर रहे हैं।
शर्मा ने कहा कि महिलाएं अपने बच्चों में संस्कार का निर्माण करावे। देश व धर्म का ज्ञान करावे। कर्तव्य का भान कराना होगा। देश के प्रति समर्पण भाव पैदा नहीं कराया गया तो देश का नव निर्माण नहीं होगा। इसके लिए ही युवा शक्ति मंच व नारी शक्ति मंच बनाया गया है।

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विहिप में दुर्गावाहिनी, मात्रृशक्ति व बजरंग दल है। लेकिन कार्यकर्ता नहीं मिल रहा है। जो मिल रहे हैं तो उनकी संख्या नगण्य है। जब तक महिलाएं अपने पूर्वजों की याद नहीं दिलाएगी तब तक युवा कुछ नहीं कर सकेगा। विदेशी धर्म के नाम पर धर्मान्तरण होता रहेगा। सनातन धर्म को बनाए रखाना होगा। युगानुकूल परिवर्तन करने के लिए सदैव चलना होगा। प्राचीनता की डींगे हाकना भी ठीक नहीं है। विश्व में अनेक राष्ट्रों का जन्म हुआ है। लेकिन आज केवल दो राष्ट्र चीन व भारत का प्रवाह अखण्ड रूप से चल रहा है। यह केवल सनातन धर्म के कारण चल रहा है। अब नई स्फ्रूर्ति का सर्जन करना होगा। देश में कट्टरता धारण करने वाले बहुत है। लेकिन हमें अध्यावत बनना होगा। अपने पुरुषार्थ के बल पर नया भविष्य तैयार करना होगा। इससे ही एक नया भारत का जन्म होगा। जो धर्मराज्य, सुराज्य, स्वराज्य, रामराज्य होगा। कार्यक्रम को जैन संत अरविन्द मुनि ने भी सम्बोधित किया।

राष्ट्रीय संयोजिका डा. वीणा सनाढ्य ने कार्यक्रम की जानकारी दी। निर्जला दीदी ने कविता पाठ किया। पंच पर काठिया बाले बाबा बनवारी शरण, केन्द्रीय मंत्री उमाशंकर तथा साध्वी समदर्शी विराजमान थी। संचालन शिखा नवल जागेटिया ने किया। इस दौरान प्रान्त उपाध्यक्ष ओमप्रकाश बूलिया, बद्रीप्रसाद सोमानी, विभाग अध्यक्ष मीठूलाल स्वर्णकार, जिलाध्यक्ष राजेन्द्र ओस्तवाल, महानगर अध्यक्ष अभिषेक अग्रवाल, गोरक्षा प्रमुख चन्द्रसिंह जैन, वर्ग सहसंयोजिका ज्योति आशीर्वाद, मंच प्रभारी प्रतिभा माली, निशा जैन आदि उपस्थित थी। इस कार्यक्रम में देश के हर कोने से नारी शक्ति केन्द्र की पदाधिकारी हिस्सा ले रही है।

कार्यक्रम के दौरान नारी शक्ति मंच पुस्तक तथा विवेक सेवा संस्थान के आंचल मदर मिल्क पोस्टर का विमोचन किया। मंच पर चित्तौडग़ढ़ किले चित्र दर्शाया गया था। इसमें पन्नाधाय, मीराबाई, रानी पद्ममावती के बलिदान के चित्र महिलाओं में जोश का संचार कर रहे थे। इस दौरान चार सत्र और आयोजित हुए। इसमें विश्व हिन्दू परिषद संगठन एवं धर्म प्रसार को जुगलकिशोर, प्राचीन काल में नारी दशा एवं वर्तमान दिशा पर साध्वी समदर्शी, नारी शक्ति मंच की धर्मप्रसार कार्य में भूमिका एवं योजना पर डॉ. वीणा सनाढ्य तथा सेवा कार्यों में नारियों की भूमिका एवं सेवा केन्द्रों का संचालन पर उमाशंकर ने सम्बोधित किया।