
वस्त्रनगरी के निर्यातकों को जल्द ही रेल मार्ग से अपने माल को मुन्द्रा पोर्ट तक भेजने का नया मार्ग मिल सकेगा। अब तक निर्यातक सडंक मार्ग से ही अपना माल निर्यात कर पा रहे है।
भीलवाड़ा।
वस्त्रनगरी के निर्यातकों को जल्द ही रेल मार्ग से अपने माल को मुन्द्रा पोर्ट तक भेजने का नया मार्ग मिल सकेगा। अब तक निर्यातक सडंक मार्ग से ही अपना माल निर्यात कर पा रहे है। यह सब केन्द्रीय बजट में उदयपुर से हिम्मतनगर तक की रेल लाइन को विद्युतीकरण करने की घोषणा करने से संभव हो सकेगा। वर्तमान में अजमेर से उदयपुर तक की रेल लाइन को विद्युतीकरण करने का काम अन्तिम चरण में चल रहा है।
मेवाड़ चेम्बर ऑफ कामर्स के कोषाध्यक्ष व रेलवे सलाहकार समिति के सदस्य वीके मानसिंहका ने बताया कि इस बजट में उदयपुर से हिम्मतनगर तक की 209.66 किलोमीटर रेल लाइन को विद्युतीकरण करने के लिए 233 करोड़ 77 लाख रुपए के बजट का प्रावधान किया है।
बंद पड़ा सूखा बन्दरगाह
प्रदेश में कुल नौ इनलैंड कंटेनर डिपो (आईसीडी) है। इनमें से चार आईसीडी बंद होने से कपड़ा, गारमेंट, यार्न, सेण्ड स्टोन, हैंडीक्राफ्ट व ग्वार गम निर्यातकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। निर्यातकों को बंदरगाहों तक माल पहुंचाने के लिए राज्य सरकार के उपक्रम राजस्थान स्माल स्केल इंडस्ट्रियल कार्पोरेशन (राजसिको) जयपुर , जोधपुर , भीलवाड़ा व भिवाड़ी में आईसीडी की स्थापना की थी। लेकिन इस उपक्रम के खस्ताहाल होने से यह चारों आईसीडी लंबे समय से बंद है। भीलवाड़ा का आईसीडी की स्थापना 2003 में ट्रांसपोर्ट नगर में की थी। कुछ माह चलने के बाद यह बन्द हो गया था। निर्यातक रेल मार्ग की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी लम्बे समय से कर रहे थे।
सबसे बड़ी बाधा होगी दूर
सूखा बन्दरगाह तक माल भेजने के लिए निर्यातकों को सड़क मार्ग से ही माल भेजना पड़ता है जो परिवहन खर्च काफी महंगा है। रेल लाइन से माल भेजने की लम्बे समय से मेवाड़ चैम्बर के माध्यम से मांग की जाती रही है। इसके लिए कई बार केन्द्रीय मंत्रियों के साथ रेल मंत्री तक को पत्र लिखे गए थे। अब रेल मार्ग से माल परिवहन करने का रास्ता मिलने पर खर्च कम होने के साथ ही उद्यमियों को समय पर माल भेजने का रास्ता भी साफ होगा। हालांकि उदयपुर से हिम्मतनगर तक की रेल लाइन का अमान परिवर्तन का काम चल रहा है।
वस्त्रनगरी से यह होता है निर्यात
वस्त्रनगरी से 5 हजार करोड़ रुपए का सालाना निर्यात होता है। इसमें यार्न, कपड़ा, सेण्ड स्टोन, टायर, जिंक, मसाला, मक्का व अन्य अनाज शामिल है। यार्न के प्रतिदिन 15 से अधिक कन्टेनर, कपड़े के तीन-चार, सेण्ड स्टोन 15 से 20, तथा अन्य उत्पाद के 10 से 15 कन्टेनर शामिल है।
Published on:
09 Feb 2018 12:15 pm

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