
देसी तमंचे बढ़ा रहे समाज व पुलिस का सिरदर्द
arms smuggling in bhilwara किशोर उम्र के बच्चे वर्चस्व को लेकर झगड़े-फसाद में हथियार से धमकाने में भी पीछे नहीं हटते। हथियार की आसानी से उपलब्धता और स्टेट्स सिम्बल इसका बड़ा कारण है। शौकिया तौर पर रखे जा रहे हथियार स्कूली बच्चों में अपराध को बढ़ावा दे रहे हैं। पुलिस के आंकड़े गवाह हैं कि पिछले चार साल में दस बाल अपचारी हथियारों के साथ पकड़े गए। उनके खिलाफ आर्म्स एक्ट में मामला दर्ज हुआ। पूछताछ में सामने आया कि स्टेट्स सिम्बल के लिए देसी तमंचे खरीदे। इसी देसी तमंचों से कई बार गैंगवार के दौरान धमकाया भी।arms smuggling in bhilwara
आधुनिकता के दौर में खुद को ढालने में लगे स्कूली बच्चे पढ़ाई से दूर होकर अपराध का रास्ता पकड़ रहे हैं। 15 से 17 साल की उम्र के बच्चे विवेक नहीं होने के कारण छोटी-मोटी लड़ाई से शुरुआत कर आगे बड़े अपराध के रास्ते पर दौड़ पड़ते हैं।
एमपी से आ रहे, गली-गली में फैक्ट्री
मध्यप्रदेश हथियार निर्माण का गढ़ है। मुरैना समेत कई जिलों में तमंचे बनाए जाते हैं। वहीं से राजस्थान में हथियार सप्लाई होते हैं। भीलवाड़ा के रास्ते होकर हथियार अन्य जिलों में भेजे जाते हैं। भीलवाड़ा में हथियार सप्लाई करने वाले कई लोग हैं। ये लोग चंद रुपयों के लालच में बच्चों और बड़ों को हथियार उपलब्ध करवाते हैं। पिछले कुछ सालों में भीलवाड़ा पुलिस के शिकंजे में आए हथियार सप्लायर इसकी पोल खुल चुके है। एमपी से इसे सात से आठ हजार में लाकर इसे भीलवाड़ा में पन्दह हजार रुपए में बेचा जाता है। शुद्ध आधे मुनाफे के लालच में अपराध का रास्ता बताया जा रहा है।
भारी पड़ सकती लापरवाही, पुलिस की उड़ी नींद
भीलवाड़ा जिले में हथियार के बढ़ते प्रचलन ने पुलिस की नींद उड़ा रखी है। लूट हो या चोरी, हत्या संगीन वारदात में इसका उपयोग हो रहा। बिना लाइसेंस के हथियार नहीं रखा जा सकता है। लेकिन इस तरह के हथियार का लाइसेंस भी नहीं मिलता। लेकिन अवैध रूप से हथियार रखा जा रहा है। छोटी बात पर किशोर उम्र के बच्चे हथियार निकाल लेते है। फायरिंग करके कई बार दहशत तक फैला चुके है।
Published on:
17 Jun 2022 10:58 am
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