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राजस्थान के इस शहर में लगेगा एशिया का तीसरा बड़ा ग्लास प्लांट, इतने लोगों को मिलेगा रोजगार, ये होगी खासियत

Rajasthan News: टेक्सटाइल सिटी भीलवाड़ा भले ही अभी तक हवाई सेवा से दूर है, लेकिन यहां अब जल्द ही हवाई जहाज व मेट्रो ट्रेन के ग्लास बनेंगे। ग्लास बनाने को लेकर भीलवाड़ा का नाम एशिया स्तर पर चमकने वाला है।

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सुरेश जैन

Rajasthan News: टेक्सटाइल सिटी भीलवाड़ा भले ही अभी तक हवाई सेवा से दूर है, लेकिन यहां अब जल्द ही हवाई जहाज व मेट्रो ट्रेन के ग्लास बनेंगे। ग्लास बनाने को लेकर भीलवाड़ा का नाम एशिया स्तर पर चमकने वाला है। भीलवाड़ा-चित्तौड़गढ़ के बीच सोनियाणा में 1300 करोड़ रुपए की लागत का एशिया का तीसरा बड़ा ग्लास प्लांट लगाया जाएगा। इसमें हवाई जहाज, ट्रेन, मेट्रो के साथ चौपहिया वाहनों व ऑटोमोबाइल्स इंडस्ट्री व अन्य में इस्तेमाल होने वाले ग्लास बनेंगे। रोजाना करीब 800 टन ग्लास का उत्पादन होगा। इससे 500 लोगों को प्रत्यक्ष व 2 हजार से अधिक को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। प्लांट में उत्पादन इसी साल दिवाली तक शुरू होने के आसार हैं।

रीको के सोनियाणा इंडस्ट्रीज एरिया में टेक्सटाइल और स्टोन इंडस्ट्रीज प्रोजेक्ट नहीं चलने के बाद सरकार ने यहां सिरेमिक एंड ग्लास इंडस्ट्रीज जोन को मंजूरी दी। यह प्लांट 3 लाख 67 हजार 500 वर्ग मीटर में स्थापित करने का सिविल वर्क चल रहा है।

कच्चा माल राजस्थान से लेंगे
सोनियाणा प्लांट में टूटे ग्लास काम में लिए जाएंगे। अब तक ग्लास टूटने के बाद उसे कचरे में फेंक देते है, जो प्रदूषण बढ़ाता है। ग्लास बनाने के लिए रॉ मेटेरियल के रूप में सिलिका सैंड, डोलोमाइट, लाइम स्टोन, फेल्सपार का उपयोग होगा। इनमें कई खनिज भीलवाड़ा जिले में मिलेंगे जबकि अन्य बूंदी, राजसमन्द, सिरोही आदि से मंगवाएंगे।

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कच्चा ग्लास होगा तैयार, फिर प्रोसेसिंग
फ्रांसीसी कंपनी का यह भारत में तीसरा प्लांट है। उसके तमिलनाडु के पैराम्बदूर व गुजरात के जागड़िया में पहले से ऑटोमैटिक ग्लास प्लांट चल रहे हैं। भीलवाड़ा प्लांट में तैयार ग्लास पहले कच्चा माल सरीखा होगा। उसे फिर गुजरात की प्रोसेसिंग यूनिट में भेजा जाएगा। उसके बाद ही बाजार में उतारा जाएगा। यहां होने वाला उत्पादन कार्बन मुक्त होगा। प्लांट में कांच बनाने के लिए नेचुरल गैस का इस्तेमाल होगा। इससे तरल ग्लास तैयार कर शीट्स बनाई जाएगी। ग्लास बनाने में बरसाती पानी का उपयोग लिया जाएगा। यह उद्योग ईको फ्रेंडली होगा।

प्लांट की खासियत
1300 करोड़ रुपए का निवेश
500 लोगों को मिलेगा रोजगार
800 टन ग्लास प्रतिदिन बनेगा
3.67 लाख हैक्टेयर जमीन पर बन रहा है उद्योग
1.40 लाख क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस का उपयोग होगा रोजाना।
24 घंटे प्लांट का होगा संचालन
30 टन ग्लास तैयार होगा एक घंटे में।
720 टन ग्लास का उत्पादन रोजाना तथा सालाना 2.50 लाख टन।
700 करोड़ का टर्न ओवर सालाना।
3 से 12 एमएम मोटे कांच का होगा उत्पादन।

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