8 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

सहायक लेखाधिकारी ने भीलवाड़ा में ली 51 हजार की घूस

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की द्वितीय शाखा ने बुधवार शाम को कुवाड़ा रोड स्थित रजिस्टार कार्यालय के सहायक लेखाधिकारी भगवतसिंह चौधरी को 51 हजार रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। यह राशि स्टाम्प लाइसेंस जारी करने की एवज में मांगी गई थी। कार्रवाई से रजिस्टार कार्यालय में हड़कम्प मच गया।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भीलवाड़ा

•

image

Narendra Kumar Verma

•

Updated: 17 Dec 2020, 10:17 AM IST

Assistant Accountant took bribe of 51 thousand in Bhilwara

Assistant Accountant took bribe of 51 thousand in Bhilwara

भीलवाड़ा। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की द्वितीय शाखा ने बुधवार शाम को कुवाड़ा रोड स्थित रजिस्टार कार्यालय के सहायक लेखाधिकारी भगवतसिंह चौधरी को 51 हजार रुपए की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। यह राशि स्टाम्प लाइसेंस जारी करने की एवज में मांगी गई थी। कार्रवाई से रजिस्टार कार्यालय में हड़कम्प मच गया। कई कर्मचारी वहां से निकल गए। एसीबी के हत्थे चढऩे के बाद चौधरी के शास्त्रीनगर में वैभवनगर स्थित घर में एसीबी की प्रथम चौकी की टीम ने तलाशी ली। यहां चौधरी के एक बैंक में लॉकर होने की पृष्टि हुई।

एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बृजराजसिंह चारण ने बताया कि 15 दिसम्बर को सेशन कोर्ट निवासी रवि मेहता ने शिकायत की थी। परिवादी ने बताया कि उसकी पत्नी हेमा मेहता के नाम पर स्टाम्प लाइसेंस जारी कराने के लिए उप महानिरीक्षक पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग भीलवाड़ा में करीब दो वर्ष पूर्व आवेदन किया था। दो वर्षोंं से उसे चक्कर दिया जा रहा था। परिवादी ने सहायक लेखाधिकारी भगवतसिंह चौधरी से सम्पर्क किया। उसने लाइसेंस जारी करवाने के बदले 51 हजार की रिश्वत मांगी। सत्यापन में शिकायत सहीं पाई गई।

सत्यापन के बाद चारण ने ट्रेप का जाल बिछाया। बुधवार शाम को परिवादी रवि मेहता 51 हजार रुपए लेकर कुवाड़ा रोड स्थित उप पंजीयक विभाग के नए दफ्तर में पहुंचा। अपने चैम्बर में चौधरी बैठा हुआ था। चौधरी शातिर था। उसने रिश्वत की राशि को हाथ नहीं लगाया। बल्कि परिवादी को कहा कि टेबल पर पड़े लिफ ाफे में 51 हजार रुपए डालकर वहीं पर रख दें। चौधरी के कहे अनुसार परिवादी रवि ने लिफ ाफे में राशि डालकर रख दी। इशारा मिलते ही एसीबी ने चौधरी को धरदबोचा। लिफ ाफे से रिश्वत की राशि बरामद कर ली।


परिवादी के स्टाम्प लाइसेंस के लिए आवेदन करने के बाद उप पंजीयक में अधिकारियों और कर्मचारियों ने एक कोने में रख दिया। परिवादी दो साल से चक्कर लगवा र हा था। लेकिन बिना रिश्वत दिए उसका काम नहीं हो रहा था। वह सहायक लेखाधिकारी चौधरी से मिला। शुरूआत में चौधरी चक्कर लगवाने लगा। उसके बाद उसने रिश्वत की मांग कर दी। पहले से ही रवि दो साल से चक्कर लगवा चुका था। ऐसे में रिश्वत की राशि मांगने से वह आजिज आ गया। उसने एसीबी को शिकायत कर दी। चौधरी कार्यालय में द्वितीय अधिकारी था। कोई भी काम उसके बिना सम्भव नहीं था।