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अपनों का बुजुर्गों पर सितम, खर्चा मांगने पर करते मारपीट

अब बुजुर्ग माता-पिता अपनों के सितम के खिलाफ भी कलक्टर के यहां अर्जी लगा रहे हैं

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अब बुजुर्ग माता-पिता अपनों के सितम के खिलाफ भी कलक्टर के यहां अर्जी लगा रहे हैं

भीलवाड़ा।
अपने घर में सरकारी विभागों से जुड़े काम के लिए तो लोग सरकारी चौखट पर अर्जी लगाते ही है, लेकिन अब बुजुर्ग माता-पिता अपनों के सितम के खिलाफ भी कलक्टर के यहां अर्जी लगा रहे हैं। कलक्टर के यहां घर खर्च दिलाने व खुद की रक्षा कराने व बेटे-बहू से सेवा कराने के लिए भी आवेदन आए हैं। जिला कलक्टर की ओर से की जाने वाली जनसुनवाई में एेसे मामलों में बढ़ोतरी हो रही है।

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कलक्ट्रेट परिसर में होने वाली जिला स्तरीय जनसुनवाई में पिछले छह माह में 29 मामले एेसे दर्ज हुए हैं। इसमें जिले के बुजुर्ग माता-पिता ने कलक्टर से मांग की है कि वे उनके बेटे-बहू उनकी सेवा नहीं करते हैं। इसमें पूरी संपत्ति भी ले रखी है और खर्चा मांगने पर मारपीट करते हैं। एेसे में उनके बेटे-बहू से उनकी रक्षा कराई जाए। अतिरिक्त जिला कलक्टर शहर के यहां भी पिछले तीन माह में आठ मामले एेसे आए हैं, जिनमें बुजुर्गों ने मदद मांगी है।

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कलक्टर की पहल पर पढ़ा रहे संस्कारों का पाठ
जो भी बुजुर्ग दंपत्ति अपने परिवारजनों के खिलाफ शिकायत लेकर जिला कलक्टर के पास आ रहे हैं उनमें भरण-पोषण अधिनियम में मुकदमा दर्ज करने के साथ ही संस्कारों का पाठ भी पढ़ाया जा रहा है। जिला कलक्टर मुक्तानंद अग्रवाल ने एेसे मामलों में बेटे-बहू को बुलाकर समझाइस भी की है। इसमें थोड़ी हिदायत के साथ ही अपने फर्ज याद दिलाए तो बेटे-बहू भी सेवा के लिए राजी हो गए।


यह है कानूनी प्रावधान

सरकार ने माता-पिता वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम 2007 बना रखा है। इसके तहत आवेदन करने पर संबंधित उपखंड अधिकारी प्रकरण दर्ज कर पुलिस के माध्यम से बेटे-बहू को पाबंद करते हैं। इस प्रकरण में एक माह में मदद करनी होती है। इसके बाद शिकायत सही होने पर संपत्ति के वारिसों को मासिक खर्चें के आदेश दिए जाते हैं। इसके लिए जिला समन्वय समिति भी बना रखी है।

इन्‍होंने की श‍िकातय
पुर में रहने वाले एक बुजुर्ग दंपती ने जिला कलक्टर को जनसुनवाई में शिकायत दी है। इसमें बताया कि उनके दो बेटे हैं लेकिन उनके साथ नहीं रखते हैं। अब बीमारी में उनकी सेवा करने वाला भी कोई नहीं है। परिवार के गुजारे का साधन केवल पेंशन है। इससे कुछ नहीं होता है। बेटों से मदद मांगते हैं तो सुनवाई नहीं करते हैं।

बनेड़ा क्षेत्र के एक गांव के दंपती ने आवेदन किया। इसमें बताया कि उनके बेटे-बहू ने उनके साथ मारपीट कर घर से निकाल दिया। अब रहने का ठिकाना भी नहीं है। इसमें जिला कलक्टर ने संबंधित पुलिस थाने को निर्देशित कर बेटे-बहू को पाबंद कराया। इसके बाद उन्हें घर में रहने की जगह मिली है।

दिलाया है अधिकार
कई माता-पिता अपने बेटे-बहू के खिलाफ भी शिकायत लेकर जनसुनवाई में आ रहे हैं। इसकी संख्या बढ़़ रही है। भरण-पोषण अधिनियम के तहत उनका अधिकार है कि उन्हें अपना हक मिले। हमारी पहल यह रहती है कि एेसे लोगों को अपने संस्कार और पारिवारिक दायित्व भी याद दिलाएं ताकि वे खुद से अपनी गलती मानकर सेवा के लिए आगे आ सके। इस पहल पर कई बेटे-बहू ने अपने माता-पिता को वापस अपने साथ लिया है।
मुक्तानंद अग्रवाल, जिला कलक्टर