उनकी 2009 में मृत्यु हो गई। 15 मार्च 2004 को परिवादी के पिता हज पर गए, इसी दौरान जाली दस्तावेज बनाकर इकरार पत्र पर हस्ताक्षर कर अभियुक्त अख्तर हुसैन ने भूखंड को हड़पने का प्रयास किया। लेकिन परिवादी परिवार समेत भूखंड का उपयोग करता आ रहा था। पुलिस ने मामला दर्ज कर अभियुक्त को गिरफ्तार अदालत में चालान पेश किया। अदालत ने अख्तर हुसैन सिलावट को दोषी मानते हुए पांच साल की सजा सुनाई है। साथ ही 45 हजार रुपए जुर्माना अदा करने के भी आदेश दिए गए।