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भीलवाड़ा की नदियां प्रदूषण से कब मुक्त होगी

लोग बोले- जनता का दुख दर्द समझने वाला हो जनप्रतिनिधि, बढ़ती आबादी के मद्देनजर दो ओवरब्रिज की जरूरत भीलवाड़ा के औद्योगिक क्षेत्र में चाय पर चर्चा

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भीलवाड़ा की नदियां प्रदूषण से कब मुक्त होगी

भीलवाड़ा की नदियां प्रदूषण से कब मुक्त होगी

भीलवाड़ा जिले की कोठारी व बनास नदी पूरी तरह से प्रदूषित हो चुकी है। इनमें शहर के साथ ही औद्योगिक इकाइयों का दूषित पानी भी जा रहा है। नदियों को पुन: साफ-सुथरा करने के लिए जनप्रतिनिधियों को आगे आने की जरूरत है। भीलवाड़ा शहर में अस्त व्यस्त यातायात बड़ी समस्या है। हर दिन जाम लगता है। ऐसे में शहर में एक नहीं बल्कि दो ओवरब्रिज बनाने की जरूरत है।


भीलवाड़ा शहर की आबादी लगातार बढ़ रही है। विधानसभा चुनाव में ऐसे जनप्रतिनिधि का चयन करना चाहिए जो शहर की हर समस्या का निराकरण कर सके। चुने जाने के बाद जनता के बीच रहे। न केवल समस्या सुने बल्कि उसका समाधान भी कराए। यह निष्कर्ष रहा भीलवाड़ा के औद्योगिक क्षेत्र में चाय की थड़ी पर चर्चा का। थड़ी पर चर्चा कर रहे लोगों ने राजस्थान पत्रिका को बताया कि शहर का विकास कोटा, उदयपुर, जोधपुर की तर्ज पर होना चाहिए।

ये थे मौजूद
पवनकुमार नाथानी, नरेन्द्र कुमार, भगवान सिंह राठौड़, गजानन्द भट्ट, प्रकाश मेघवंशी, मुकेश सोनी, भैरूलाल तेली तथा राजेन्द्र कुमार शामिल थे।

भीलवाड़ा शहर की समस्याएं
* यातायात व्यवस्था खराब है। शहर की बढ़ती जनसंख्या के आधार पर दो ओवरब्रिज बनने चाहिए। अंडरपास में पानी भर जाता है। इससे जाम लग जाता है।
* निजी कॉलोनियों को चंबल का पानी नहीं मिल रहा है।
* सीवरेज का काम सही नहीं हुआ। आम आदमी परेशान है। रोड भी ऊंची, नीची होने से दुर्घटनाएं हो रही है।
* शहर में जगह-जगह कचरा पात्र बनाए है, लेकिन इनसे समय पर कचरा नहीं उठाया जाता।
* शहर में आवारा मवेशी काफी है। इससे दुर्घटनाए हो रही है।
* नालियों से पानी की निकासी की व्यवस्था सही नहीं है। मकानों में सीलन आ रही है।
* अंडरपास का निर्माण सही नहीं होने से परेशानी हो रही है।
* शहर का विकास बड़े शहरों की तर्ज पर होना चाहिए।
* शहर को पर्यटक के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
* कोठारी व बनास नदी में प्रोसेस हाउस का पानी आ रहा उसे रोकना होगा।
* शहर में अपराध व अतिक्रमण बढ़ रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई नहीं करते।