scriptBhilwara Irrigation DepartmentDanger of breaking of Nahar Sagar dam in | Bhilwara Irrigation Department नाहर सागर बांध के मानसून में टूटने का खतरा | Patrika News

Bhilwara Irrigation Department नाहर सागर बांध के मानसून में टूटने का खतरा

Bhilwara Irrigation Department फूलियाकलां क्षेत्र का सबसे बड़ा नाहर सागर बांध के मानसून काल में टूटने का खतरा बना हुआ है। बांध की पाल व पिचिंग में दरारें हो रही और बड़े गडढ़े अनदेखी की पीड़ा बयां कर रहे हैं। जल संसाधन विभाग को लापरवाही भारी पड़ सकती है।

भीलवाड़ा

Updated: April 25, 2022 11:13:50 am

Bhilwara Irrigation Department फूलियाकलां क्षेत्र का सबसे बड़ा नाहर सागर बांध के मानसून काल में टूटने का खतरा बना हुआ है। बांध की पाल व पिचिंग में दरारें हो रही और बड़े गडढ़े अनदेखी की पीड़ा बयां कर रहे हैं। जल संसाधन विभाग को लापरवाही भारी पड़ सकती है। आलम यह है कि बांध के गेट को खोलने का मौका आया तो अफसरों की सांसें फूल सकती है। Bhilwara Irrigation Department
Danger of breaking of Nahar Sagar dam in monsoon
Danger of breaking of Nahar Sagar dam in monsoon
रियासत काल के समय बने बांध की सार संभाल नहीं हाेने से पाल काे खतरा है। पूर्व में भी कई बार बांध की पाल में गल्ला लग चुका है। ग्रामीणों ने इसे लेकर अफसरों को शिकायत की। इसके बाद भी देखरेख में लापरवाही बरती जा रही है। मरम्मत के लिए बजट नहीं मिलने से यह िस्थति बनी हुई है।
पांच हजार हैक्टेयर में सिंचाई
16 फीट भराव क्षमता वाले बांध का केचमेंट एरिया 539 वर्ग किमी है। इससे 4777 हैक्टेयर भूमि सिंचित होती है। बांध के रखरखाव का जिम्मा जल संसाधन विभाग के पास है। पाल की मरम्मत व रखरखाव पर ध्यान नहीं देने से बांध ओवरफ्लो होने पर खतरा हो सकता है। पेटा क्षेत्र में रहने वाले भीमपुरा, डोहरिया व काशीपुरिया के ग्रामीणों को मानसून काल में पाल पर गल्ला लगने का डर रहता है। ग्रामीणों का आरोप है कि पहले भी सरकार ने पैकेज जारी कर बांध का जीर्णोद्धार कराया। एक साल बाद ही पाल जीर्णशीर्ण हो गया। जीर्णोद्धार के बाद बांध की पाल पर भारी वाहनों की आवाजाही व पिछले साल बांध के अंदर अतिक्रमण कर दो कुओं की खुदाई करने से पाल क्षतिग्रस्त हुई है। बांध में पानी आने से यह कुएं डूब चुके हैं।
राहत के लिए बुलानी पड़ी थी सेना
बांध के आसपास अतिक्रमण की भरमार है। पेटा क्षेत्र में अवैध रूप से खेती की जाती है। करीब बाइस साल पूर्व बांध पर चेन संख्या 72 की पाल पर बड़ा गल्ला लगा था। राहत के लिए सेना को बुलाना पड़ा था। जीर्णोद्धार होने पर अधिकारी और जल उपयोक्ता समिति काम की निगरानी करें। ताकि उसकी गुणवत्ता आ सकें।

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

बड़ी खबरें

सीएम Yogi का बड़ा ऐलान, हर परिवार के एक सदस्य को मिलेगी सरकारी नौकरीचंडीमंदिर वेस्टर्न कमांड लाए गए श्योक नदी हादसे में बचे 19 सैनिकआय से अधिक संपत्ति मामले में हरियाणा के पूर्व CM ओमप्रकाश चौटाला को 4 साल की जेल, 50 लाख रुपए जुर्माना31 मई को सत्ता के 8 साल पूरा होने पर पीएम मोदी शिमला में करेंगे रोड शो, किसानों को करेंगे संबोधितराहुल गांधी ने बीजेपी पर साधा निशाना, कहा - 'नेहरू ने लोकतंत्र की जड़ों को किया मजबूत, 8 वर्षों में भाजपा ने किया कमजोर'Renault Kiger: फैमिली के लिए बेस्ट है ये किफायती सब-कॉम्पैक्ट SUV, कम दाम में बेहतर सेफ़्टी और महज 40 पैसे/Km का मेंटनेंस खर्चIPL 2022, RR vs RCB Qualifier 2: 14 ओवर के बाद आरसीबी 3 विकेट के नुकसान पर 111 रनपूर्व विधायक पीसी जार्ज को बड़ी राहत, हेट स्पीच के मामले में केरल हाईकोर्ट ने इस शर्त पर दी जमानत
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.