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Bhilwara Irrigation Department पेटे में मोटर लगाकर अवैध खेती, चोरी के पानी से बगिया हरी-भरी

शहर से पन्द्रह किलोमीटर दूर लम्बा- चौड़ा गुरला तालाब। यह तालाब राजसमन्द हाइवे से गुजरते समय बरबस लोगों को अपनी ओर खींचता है। पिछले साल मानसून की बेरूखी के कारण तालाब में पर्याप्त पानी नहीं आया। गर्मी में पानी पेटे तक सिमट गया।
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भीलवाड़ा

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Akash Mathur

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Updated: 31 May 2022, 10:31 AM IST

पेटे में मोटर लगाकर अवैध खेती, चोरी के पानी से बगिया हरी-भरी

पेटे में मोटर लगाकर अवैध खेती, चोरी के पानी से बगिया हरी-भरी

Bhilwara Irrigation Department शहर से पन्द्रह किलोमीटर दूर लम्बा- चौड़ा गुरला तालाब। यह तालाब राजसमन्द हाइवे से गुजरते समय बरबस लोगों को अपनी ओर खींचता है। पिछले साल मानसून की बेरूखी के कारण तालाब में पर्याप्त पानी नहीं आया। गर्मी में पानी पेटे तक सिमट गया। अब यहां कमाई के फेर में लोग पेटे में धड़ल्ले से पानी की चोरी कर रहे है। बांध के पेटे में अवैध रूप से खेती कर चोरी के पानी से बगिया को हरी.भरी की जा रही है।Bhilwara Irrigation Department

इससे जून में तालाब के पेटे में विचरण करने वाले मवेशियों के पीने के पानी पर संकट आ सकता है। आसपास के कुओं पर भी पानी चोरी का असर देखा जा रहा है। जल संसाधन विभाग की लापरवाही और आंख मूंदने के कारण यह सब हो रहा है। यहां रात तो दूर दिन में ही मोटर लगाकर पानी का अवैध दोहन हो रहा है। यहां जाल बिछाकर मछलियां भी पकड़ी जा रही है।

पचास फ ीसदी हिस्से पर कब्जा, सब्जी और खरबूजे की खेती

पेटे में किसानों ने पचास फ ीसदी हिस्से में सब्जियां, ककड़ी, खरबूजा और चारा समेत कई तरह की फसल बो रखी है। ये काश्तकार अपनी फ सल की पिलाई के लिए दिन,रात इंजन या अन्य स्रोत के माध्यम से पानी का अवैध रूप से दोहन कर रहे हैं। लेकिन पानी चोरी रोकने के लिए कोई प्रयास नहीं हो रहे। सबको लगता है कि ऐसा हर साल होता है, लेकिन इस बार तो हद ही हो गई कि तालाब के आधे से ज्यादा क्षेत्र को खेतों का रूप दे दिया गया है। पेटे में बचे पानी में कई जगह पंप लगे हुए है। जमीन में प्लास्टिक के पाइप तक डाले हुए है।


गांव के हक पर डाका, 84 एमसीएफ टी क्षमता

गुरला तालाब पूरी तरह से सिंचाई के काम आता है। तालाब भरने पर विभाग नहरों को खोलकर सिंचाई के लिए पानी छोड़ता है। 84 एमसीएफटी क्षमता के तालाब पर पानी चोरी करके दूसरों के हक पर डाका डाला जा रहा है। अगर तालाब में पानी रहता है तो मानसून में जल्दी भरने पर किसानों को इसका फायदा नहरों में पानी छोड़कर मिलता है।

इनका कहना है
गुरला तालाब के पेटे में खेती करना गलत है। मोटर लगाकर पानी खींचा जा रहा है तो दिखवाता हूं। इसका पानी सिंचाई के काम आता है। तालाब भरने पर नहरें खोलकर सिंचाई के लिए छोड़ा जाता है।
- सी.एल कोली, अधिशाषी अभियंता [द्वितीय] जल संसाधन विभाग