
पक्षी विहार चावंडिया
पक्षी ग्राम चावंडिया के वेटलैंड के रूप में चिन्हित किए जाने के बावजूद यहां की विकास योजना वन विभाग की फाइल से बाहर नहीं निकल पाई है। मौजूदा हालात यह है कि देश के विभिन्न हिस्सों व सात समुन्दर पार से सर्दी की छुट्टियां बिताने आने वाले विदेशी व देशी पक्षियों की आवक कम हुई है।
चावंडिया तालाब वेटलैंड के रूप में चिन्हित
राज्य सरकार ने गत वर्ष भीलवाड़ा जिले के एकमात्र चावंडिया तालाब को वेटलैंड के रूप में चिन्हित किया था। इसके तहत प्रशासन व वन विभाग को तालाब क्षेत्र को पक्षी विहार के सुरक्षित स्थल के रूप में विकसित करते यहां पर्यटन हब बनाना था, लेकिन सरकारी स्तर पर अभी तक पहल नहीं हो पाई। यह तालाब सवाईपुर तहसील के बनका खेड़ा में है।
लगातार घट रहा पानी
संरक्षण के अभाव में इस वर्ष पानी की आवक कम रही। गिरते जल स्तर के कारण दो माह में तालाब के सूखने और इसमें मौजूद हजारों जलचरों के जल्द ही दम तोड़ने की आशंका बढ़ गई है। यहां बड़ी तादाद में मौजूद मछलियों को सर्वाधिक खतरा है।
विदेशी पक्षियों की आवक रूकी
दीपावली बाद मंगोलिया, चीन, रूस एवं यूरोप इत्यादि देशों से लंबी दूरी तय कर हजारों विदेशी पक्षियों की आवक शुरू होती है। इनमें मुख्यत: हेडेडगूज, डॉलमिशन पेलिकन, पेंटेड स्टॉर्क इत्यादि प्रजातियां शामिल है। तालाब में पानी नहीं होने से अभी तक यहां बड़ी संख्या में विदेशी पक्षी नहीं पहुंचे है।
पानी नहीं आया तो बड़ा नुकसान
रिटायर्ड फौजी जगदीशचंद्र शर्मा व वार्ड पंच रामेश्वरलाल जाट बताते है कि तालाब में जल्द ही पानी नहीं छोड़ा गया तो यहां की प्राकृतिक संपदा के साथ पक्षी, मछलियां आदि का अस्तित्व सिमट सकता है। मत्स्य विभाग एवं जलधारा विकास संस्थान द्वारा इस तालाब में लगभग डेढ़ लाख मछलियों के बीज गत वर्ष डाले गए थे, जो अब खतरे में है।
जल संपदा को बचाना होगा
स्वामी विवेकानंद विवाह संस्थान चावंडिया के अध्यक्ष शुभम ओझा का कहना है कि राज्य सरकार ने कुछ माह पहले ही चावंडिया को वेटलैंड घोषित किया, लेकिन प्रशासन की अनदेखी से चावंडिया में पानी कम रह गया। प्रशासन को चावंडिया में पानी छोड़कर यहां मौजूद जल संपदा को बचाना चाहिए।
Published on:
27 Nov 2023 11:46 am
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