29 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भीलवाड़ा

अफसरों व नेताओं की नाकामी दिखा रहे भीलवाड़ा के अंडरपास

जोखिमभरे अंडरपास: 8 किलोमीटर में बने हैं 6 जगहों पर अंडरपास

Google source verification


वरुण भट्ट भीलवाड़ा. वस्त्रनगरी में बीते दशकों में रेलवे लाइन पर बनाए अंडरपास तत्कालीन अफसरों व नेताओं की नाकामी उजागर कर रहे हैं। जब ये अंडरपास बनाए गए, तब विकास एजेंसियों व नेताओं ने दूूरदर्शिता से सोचा होता तो वर्तमान में अंडरपास के कारण शहरवासियों को इतनी तकलीफें नहीं झेलनी पड़ती। हालात ही बता रहे हैं कि अंडरपास बनाने के दौरान तत्कालीन जिम्मेदारों के पास विजन व तकनीकी का अभाव था। जहां चाहा, वहां खानापूर्ति जैसे अंडरपास बना दिए गए। एक तरफ प्रदेश में जोधपुर व कोटा शहर में ओवरपास हो या अंडरपास, उसकी सुगमता व सुविधा देखते ही बनती है। दूसरी तरफ भीलवाड़ा में रेलवे लाइन पर बने अंडरपास से लोगों का गुजरना बड़ी परीक्षा से कम नहीं है। बरसात के समय तो अधिकतर अंडरपास हादसे का सबब बन रहे हैं। पत्रिका टीम ने बुधवार को रेलवे लाइन पर बने सभी अंडरपास के हालात देखे।

पेश है लाइव रिपोर्ट:
100 फीट रोड : लकड़ी की बल्ली लगा बंद की आवाजाही
कुछ ही दूर दो अंडरपास है। मारुति नगर के अंडरपास पर लोहे के पिलर हैं, लेकिन प्लास्टिक की चद्दर का अभाव है। 100 फीट रोड मारुति नगर के दूसरे अंडरपास की स्थिति तो इतनी दयनीय है कि यहां पानी भरा होने से लकड़ी की बल्ली लगाकर आवाजाही बंद कर दी गई।
पानी निकासी की मोटर भी नहीं
रेलवे फाटक अंडरपास में दोपहर में बरसात शुरू होने के पहले से ही पानी भरा था। बरसात के बाद यहां स्थिति ज्यादा बिगड़ गई। चंद्रशेखर आजाद नगर के नजदीक एवं समेलिया फाटक के अंडरपास की स्थिति ठीक हैं, लेकिन बरसात में परेशानी आम बात है। समेलिया फाटक पर बाकायदा चेतावनी बोर्ड लगा रखा है। यूआईटी के सामने अंडरपास में पानी निकासी की मोटर भी नहीं लगी है। ऐसे ही हाल अन्य जगह भी है।
ऐसे हैं हालात-
-अधिकांश में पानी निकासी पंप का अभाव
-कुछ जगह लोहे के पिलर खड़े किए, प्लास्टिक की चद्दर नहीं लगाई।
-अंडरपास पार करने के दौरान ढलान पर बेतरतीब स्प्रीड ब्रेकर।
-रोशनी की व्यवस्था भी नहीं।
-बरसात में अंडरपास पानी से भरे रहने से आवाजाही प्रभावित।
-बरसात थमने के बाद भी कुछ जगह तो कई दिन तक पानी फैला रहता है।
तब डीईओ ने बचाई थी जान
गत वर्ष बरसात में शहर के अंडरपास लबालब होने से आवागमन ठप हो गया था। इस दौरान शिक्षा निदेशालय की टीम के अधिकारी रेलवे फाटक अंडरपास के पानी में फंस गए थे। तब डीईओ ने कार का दरवाजा खोल अपनी जान बचाई थी। इसके बावजूद नगर परिषद ने अब तक समस्या के स्थायी समाधान को लेकर कोई पहल नहीं की है।
लोग बोले, हादसे का डर हर पल
मारुति नगर में सुभाष भाई ने बताया कि इन अंडरपास से रोजाना आवाजाही रहती है। पानी भरा होने से दिक्कतें बढ़ती हैं। इसका स्थायी समाधान होना चाहिए। रेलवे फाटक के नजदीक युवा राहुल कुमार बताते हैं कि बरसात में परेशानी बढ़ जाती है। हादसों का भय बना रहता है। श्यामसुंदर ने बताया, शहर के अधिकांश अंडरपास की हालत दयनीय है। नगर परिषद को इनके रखरखाव पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, ताकि लोगों को परेशानी न हो।
इनका कहना है-
अंडरपास तीन ही हैं, शेष रेलवे के नाले हैं। वर्ष 2002-03 एवं 2008 में निर्माण के बाद तीनों अंडरपास पर पानी निकासी के लिए पंप लगाए गए हैं। बड़े शहरों में सीवरेज का कार्य होने से अंडरपास पर समस्या नहीं है। यहां भी सीवरेज का कार्य हो जाने के बाद किसी तरह की समस्या नहीं आएगी।
राकेश पाठक, सभापति नगर परिषद भीलवाड़ा