उप रजिस्ट्रार अरविन्द ओझा ने बताया कि समितियों के काश्तकारों के आधार पर वार्ड का अलग से गठन किया गया है। प्रत्येक ग्राम सेवा सहकारी समिति में अधिकतम 12 वार्ड बनाए जाएंगे। वार्डों का आरक्षण वर्तमान कमेटी द्वारा लॉटरी के माध्यम से तय किया जा रहा है। एक- एक वार्ड एससी-एसटी, 2 वार्ड महिला और शेष वार्ड सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित होंगे। प्रत्येक समिति में 12 संचालक मंडल के सदस्य चुने जाएंगे। 12 सदस्यों में से ही एक अध्यक्ष ऋणी सदस्यों से चुना जाएगा। ऋणी सदस्य का मतलब ऐसे सदस्य से है जिसने संस्था से पिछले तीन वित्तिय वर्षो की अवधि में कम से कम एक बार नकद या कृषि आदान के रूप में ऋण लिया हो।