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Bhilwara news: नाले किनारे के ठेले खिला रहे फास्ट फूड या स्लो पॉइजन

शहर में फास्ट फूड के नाम पर सेहत से खिलवाड़ हो रहा और जिम्मेदार महकमा आंख मूंदे है। ठेलों पर बिक रहे फास्ट फूड में घिटया सामग्री ही इस्तेमाल नहीं हो रही बल्कि ये ऐसी जगह तैयार हो रहे हैं, जिसके चारों तरफ गंदगी के अंबार लगे रहते हैं।

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Bhilwara news: नाले किनारे के ठेले खिला रहे फास्ट फूड या स्लो पॉइजन

Bhilwara news: नाले किनारे के ठेले खिला रहे फास्ट फूड या स्लो पॉइजन

शहर में फास्ट फूड के नाम पर सेहत से खिलवाड़ हो रहा और जिम्मेदार महकमा आंख मूंदे है। ठेलों पर बिक रहे फास्ट फूड में घिटया सामग्री ही इस्तेमाल नहीं हो रही बल्कि ये ऐसी जगह तैयार हो रहे हैं, जिसके चारों तरफ गंदगी के अंबार लगे रहते हैं। यहां तक कि सार्वजनिक शौचालयों और नालों के किनारे या ऊपर भी ठेले लगाए जा रहे हैं। गंदगी भरी जगह ये ठेले फास्ट फूड के नाम पर स्लो पॉइजन बेच रहे हैं। पित्रका टीम ने भीलवाड़ा शहर में फास्ट फूड के ठेलों का जायजा लिया, खासकर ये जहां खड़े होते हैं। पाया कि गंदगी के ढेर के आसपास खड़े ठेलों पर लोग चटखारे ले रहे हैं।

शहर में नेहरु गार्डन रोड, सुभाषनगर छोटी पुलिया, राजीव गांधी पार्क के पास, कॉलेज के बाहर, सरस्वती सर्किल, शास्त्रीनगर, आजाद नगर में कुम्भा सर्किल, पन्नाधाय सर्किल, शिवाजी पार्क सहित जगह-जगह फास्ट फूड के ठेले और दुकानें हैं। गांवों में भी जगह-जगह फास्ट फूड बिक रहा है। मालूम हो, प्रदेश में तीन दिन से शुद्ध के लिए युद्ध अभियान चलाया जा रहा है। उसके बाद भी शहर में प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। जिला प्रशासन और चिकित्सा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई के नाम पर आंखें मूंदे बैठे हैं।

दुर्गन्ध के बीच चटखारे
शहर में नेहरु गार्डन के पास बड़ा नाला है और शौचालय है। यहां एक दर्जन से ज्यादा फास्ट फूड के ठेले लगते हैं। नाले के किनारे खड़े होकर फास्ट फूड तैयार किए जा रहे हैं। नाले के पास इनके बर्तन और पानी रखते हैं। आसपास गंदगी पसरी रहती है। नाले और शौचालय से दुर्गन्ध उठती रहती है। नाले के पास बैठकर लोग फास्ट फूड के चटकारे लेते दिखते हैं। फास्ट फूड बनाने वाले कुक एप्रीन, ग्लब्स और कैप का इस्तेमाल भी नहीं करते हैं। यह नजारा हर चौराहे पर दिखता है।

सिंथेटिक मसाले घिटया तेल
फास्ट फूड के ठेलों पर चाऊमीन, पाव-भाजी, डोसा, मंचूरियन, चिली पनीर, इडली-सांभर, बर्गर और मोमोज आदि बिक रहे हैं। इन्हें तैयार करने में सिंथेटिक पनीर, घटिया तेल, मसाले और सब्जी काम में लिए जा रहे हैं तथा कई घातक रसायन मिलाए जा रहे हैं। इन्हें खाने से लोगों के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। पेट, लीवर और किडनी सम्बन्धी बीमारियां हो रही है। मोटापा भी बढ़ रहा है।
कई केमिकल तक मिलाते हैं
रेस्टारेंट और फास्ट फूड में स्वाद के लिए एजिनोमोटो व मोनो सोडियम ग्लूमेट नामक रसायन मिलाया जाता है । असल में खाना शुद्ध या ताजा न हो तो भी इस केमिकल की वजह से स्वादिष्ट लगता है। विशेषज्ञ इसकी वजह जीभ की स्वाद ग्रंथियों का उत्तेजित होना मानते हैं। जरूरत से ज्यादा उपयोग बांझपन, माइग्रेन, ब्लड प्रेशर, न्यूरॉन्स से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकता है। विभाग ने एक होटल पर कार्रवाई करते घातक केमिकल पकड़े थे लेकिन उसके बाद भी कड़ी कार्रवाई नहीं हुई है।

हो सकती कई बीमारियां
डिप्टी सीएमएचओ डॉ. घनश्याम चावला का कहना है कि एजिनोमोटो के इस्तेमाल से सिर दर्द, िमतली, उल्टी, अनिंद्रा, धड़कन बढ़ने से सीने में दर्द, हृदय की मांसपेशियों में खिंचाव की समस्या हो जाती है। इसका उपयोग चायनीज खाने और रेस्टोरेंट के खाने को स्वादिष्ट बनाने में किया जाता है। इसमें प्रमुख रूप से नूडल्स, सूप, बर्गर, पिज्जा में भी इसका भरपूर उपयोग होता है।

करेंगे कार्रवाई
जिले में मिलावटी और दूषित खाद्य पदार्थों के खिलाफ जिले में शुक्रवार से शुद्ध के लिए युद्ध अभियान चलाया जा रहा है। इसमें फास्ट फूड विक्रेताओं के खिलाफ प्रमुखता से कार्रवाई करते सैम्पल लिए जाएंगे।
डॉ. मुस्ताक खान, सीएमएचओ भीलवाड़ा