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Bhilwara news : दुल्हा-दुल्हन की तरह सजकर आए और दीक्षा लेकर संत व साध्वी बने, देखते रह गए लोग

- सांसारिक जीवन का त्याग कर चारों ने संयम पथ अंगीकार किया और मोह माया का त्याग कर साधु जीवन अपनाया - आचार्य पुंडरीक रत्न सूरिजी महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन के कल्याण के लिए संयम पथ ही सर्वश्रेष्ठ

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They came dressed as bride and groom and became saints and nuns after taking initiation, people kept watching

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Bhilwara news : भीलवाड़ा आसींद. भव्य पांडाल में गाजे-बाजे के बीच जैन समाज की तीन महिलाएं दुल्हन व एक व्यक्ति दुल्हे की तरह सजकर पहुंचे। देशभर से आए लोगों ने उनका स्वागत किया। संत-साध्वियों की मौजूदगी में धार्मिक रस्में निभाई गईं। देखते ही देखते समाज के सामने तीन महिलाएं साध्वी बन गई तो एक व्यक्ति संत बन गए। अब उन्हें नए नामों से पहचाना जाएगा। भीलवाड़ा जिले के आसींद के अंटाली में जैन संत आचार्य पुंडरीक रत्न सूरिजी महाराज के सानिध्य में चार मुमुक्षुओं ने जैन भागवती दीक्षा ग्रहण की।

सांसारिक जीवन छोड़ अपनाया संयम पथ

भौतिक युग में सांसारिक जीवन का त्याग कर चारों ने संयम पथ अंगीकार किया और मोह माया का त्याग कर साधु जीवन अपना लिया। जैन समाज की ओर से अंटाली में आयोजित भव्य दीक्षा महोत्सव में मध्यप्रदेश के भोपाल निवासी निलेश डागा, पत्नी नीता डागा, पुत्री खुशी डागा व अहमदाबाद से मुमुक्षु सूर्य बहन ने दीक्षा ग्रहण की। दीक्षा महोत्सव में आचार्य आचार्य पुंडरीक रत्न सूरिजी महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन के कल्याण के लिए संयम पथ ही सर्वश्रेष्ठ है। संसार में भोग विलासिता, मोह, माया, राग, द्वेष आदि कषायों के जाल में फंसने के पश्चात मिलने वाले तात्कालिक सुख से कर्म बंधन बढ़ते हैं। इससे जीवन कल्याण के बजाय विनाश की ओर जाता है। पूर्व जन्म में किए गए अच्छे कर्मों की बदौलत हमें मनुष्य जीवन प्राप्त हुआ है। हमें अपने जीवन का महत्व समझना चाहिए और परमात्मा का सानिध्य और संतजनों की प्रेरणा से जीवन के कल्याण के लिए सबसे श्रेष्ठ संयम मार्ग पर अग्रसर होकर स्वकल्याण का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए। अन्य संत-साध्वियों ने भी जीवन में संयम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए समय का सदुपयोग करने की प्रेरणा दी। समारोह में संत और साध्वियों का सानिध्य प्राप्त हुआ।

दीक्षा से पहले निकाली यात्रा

दीक्षा से पहले वैरागिनों की महाभिनिष्क्रमण यात्रा निकाली गई। यात्रा उनके अस्थाई निवास से गाजे-बाजों के साथ शुरू होकर दीक्षा स्थल पहुंची। यात्रा में सभी परिजन व धर्मावलंबी जयकारे लगा रहे थे। मुमुक्षुओं का केश लोचन करने के बाद साध्वी वेश धारण कर जैनाचार्य के समक्ष पहुंची और दीक्षा पाठ प्रदान करने का आग्रह किया। आचार्य ने पांडाल में मौजूद संतों-साध्वियों और हजारों श्रावक-श्राविकाओं की स्वीकृति पर चारों को दीक्षा मंत्र प्रदान कर संयम पथ पर बढ़ने की आज्ञा दी। दीक्षा मंत्र प्रदान करते ही पूरा पांडाल भगवान महावीर स्वामी और जयघोष से गूंज उठा।

अंटाली में पहली बार एक साथ 4 दीक्षा

मुमुक्षुओं को दीक्षा प्रदान करने के बाद आचार्य पुंडरीक रत्न सूरिजी महाराज ने चारों का नया नामकरण किया। अब निलेश डागा को विजय श्री जी, नीता डागा को वचन सिद्धि श्रीजी, खुशी डागा को वचन शुद्धि श्री जी, सूर्य बहन को सिद्धि दर्शना श्रीजी के नाम से पहचाना जाएगा। अंटाली में पहली बार एक साथ चार दीक्षा हुई। दीक्षा महोत्सव में देशभर से आए हजारों जैन धर्मावलंबी शामिल हुए। पिछले तीन दिनों से चल रहा भव्य दीक्षा महोत्सव के समापन जय घोष के साथ हुआ।

संत व साध्वी बनते ही लोग हुए भावुक

नामकरण से पहले डागा परिवार को अंतिम बार पति-पत्नी और पुत्री से मंगल भाव के साथ आपस में मिलने का दृश्य देखकर पंडाल में बैठे हजारों स्त्री पुरुषों के आंखें खुशी से नम हो गई। डागा परिवार के एक सदस्य ने सात साल पहले ही दीक्षा ले ली थी। इन तीनों के दी दीक्षा लेने के साथ ही पूरा डागा परिवार संयम पथ पर चल पडा है।

मंगल गीतों से गूजां अंटाली गांव

दीक्षा महोत्सव रविवार सुबह 6 बजे प्रारम्भ हुआ। लोग सुबह पांच बजे से ही दीक्षा स्थल पर आने लगे थे। चारो तरफ मंगल गीत व शहनाई सुनाई दे रही थी। मंच पर धार्मिक कार्यक्रम, गीत संगीत और उद्बोधन चल रहे थे। संतो के मांगलिक उद्बोधन, पर लोग हर्ष हर्ष कर रहे थे। दीक्षा महोत्सव का मुख्य समारोह सुबह 9 बजे प्रारम्भ हुआ। दीक्षार्थियों का रजोहरण, ओगा और पूंजनी समर्पित की गई। चारों ने सांसारिक परिधान को त्याग कर संत के सफेद वस्त्र पहने। ट्रस्ट अध्यक्ष देवेंद्र कुमार बाबेल, प्रवीण कुमार व सुनील कुमार ने बताया कि ग्रामीणों को पहली बार केस लोचन देखने का मौका मिला।

किसने क्या कहा

सहकारिता मंत्री गौतम दक ने कहा कि जैन धर्म एक उत्कृष्ट धर्म है। भीलवाड़ा सांसद दामोदर अग्रवाल ने कहा दीक्षा जीवन को सफल बनाने का एक उत्कृष्ट मार्ग है। भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी ने कहा कि जैन धर्म के महत्व को जीवन में उतरना और उसे समझना आवश्यक है। सहाड़ा विधायक लादू लाल पिपलिया, आसींद विधायक जब्बरसिंह सांखला, मध्यप्रदेश के जावरा से आए विधायक ओमप्रकाश सकलेचा व पूर्व मंत्री रामलाल जाट ने अपने विचार रखे। पूर्व विधायक हगामी लाल मेवाड़ा, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रशांत मेवाड़ा, कल्पेश चौधरी, घीसालाल बाबेल व शांतिलाल बाबेल उपस्थि थे। अतिथियों का समाज की ओर से स्वागत किया गया। ऋषभदेव जैन मंदिर ट्रस्ट एवं जैन श्रावक संघ के सदस्यों का आभार जताया।