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भीलवाड़ा के अफसरों ने गर्त में धकेला सीएम का ड्रीम प्रोजेक्ट

लापरवाही: पालड़ी में बनना था मिनी सचिवालय, लेकिन दस साल से अटका हैभीलवाड़ा नगर विकास न्यास
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भीलवाड़ा

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Suresh Jain

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Updated: 12 Jul 2023, 11:09 AM IST

भीलवाड़ा के अफसरों ने गर्त में धकेला सीएम का ड्रीम प्रोजेक्ट

भीलवाड़ा के अफसरों ने गर्त में धकेला सीएम का ड्रीम प्रोजेक्ट

सुरेश जैन
भीलवाड़ा. टेक्सटाइल सिटी भीलवाड़ा में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का ड्रीम प्रोजेक्ट मिनी सचिवालय बनाने की योजना को ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। अफसरों की लापरवाही से इस प्रोजेक्ट के लिए चिन्हित जमीन को छिन्न-भिन्न कर दिया गया, लेकिन योजना को आगे बढ़ाने के प्रयास नहीं किए गए।


जानकारी के अनुसार नगर विकास न्यास की पालड़ी, सांगानेर, तेलीखेड़ा, आरजिया की करीब सात हजार एकड़ जमीन में मिनी सचिवालय बनाने की योजना थी। शहर के सरकारी ऑफिसों को मिनी सचिवालय में शिफ्ट कर उनकी खाली जगह का कॉमर्शियल उपयोग किया जाना था। वहां पर कलक्ट्रेट व एसपी ऑफिस कार्यालय के लिए दो मंजिला भवन निर्माण के टेंडर हो चुके थे। इस बीच राज्य में भाजपा सरकार आने के बाद काम आगे नहीं बढ़ा, लेकिन राज्य में पुन: कांग्रेस की सरकार का राज आने के बाद भी इस योजना को आगे नहीं बढ़ाया गया।
9 सितंबर 2013 को किया था शिलान्यास
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 9 सितंबर 2013 काे मिनी सचिवालय, जाेधड़ास ओवरब्रिज, काेठारी नदी हाई लेवल ब्रिज का शिलान्यास किया था। तीनाें याेजनाएं न्यास की है। जाेधड़ास ओवरब्रिज व काेठारी नदी हाईलेवल ब्रिज का काम चल रहा है। मिनी सचिवालय ठंडे बस्ते में है। इनके निर्माण पर 90 करोड़ रुपए व्यय हो चुके हैं।
अधिकारियों ने नहीं किया काम

शहर के विकास चिन्तकों का कहना है कि सीएम गहलोत के प्रोजेक्ट को पूरा करने का काम अधिकारियों का है, लेकिन वे इस प्रोजेक्ट को भूल गए। हाईलेवल ब्रिज लॉ लेवल का बनकर रह गया। जोधड़ास ओवरब्रिज का काम भी अधूरा है। अब तक न्यास ने 100 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।
इन तीन कारण से अटका प्रोजेक्ट
- योजना बनने के बाद इसका कोई फॉलोअप नहीं किया गया।
- योजना से जुड़ी फाइल किसके पास है, यह किसी को ध्यान नहीं है।
- योजना के तहत धारा 32 की कार्रवाई हो गई, लेकिन आगे कुछ नहीं हुआ।
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पता करते हैं, कहां अटका मामला
मिनी सचिवालय की योजना मेरे से पहले की है। ऐसे भी यह मामला सरकार के पास विचाराधीन है। फिर भी इसकी जानकारी फाइल देखने के बाद ही बता सकता हूं कि मामला कहां अटका हुआ है।
-अजय आर्य, सचिव, नगर विकास न्यास, भीलवाड़ा