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पहले सफाई के नाम पर करोड़ों डूबा दिए, फिर खर्च की तैयारी, अब भी गांधी सागर डम्पिंग यार्ड

- नगर परिषद के लिए तालाब बना सफेद हाथी- अफसर भर रहे जेबे, जनता को गंदगी से नहीं मिली निजात
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भीलवाड़ा

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Suresh Jain

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Updated: 19 Aug 2023, 11:40 AM IST

पहले सफाई के नाम पर करोड़ों डूबा दिए, फिर खर्च की तैयारी, अब भी गांधी सागर डम्पिंग यार्ड

पहले सफाई के नाम पर करोड़ों डूबा दिए, फिर खर्च की तैयारी, अब भी गांधी सागर डम्पिंग यार्ड

भीलवाड़ा. शहर का गांधीसागर तालाब नगर परिषद के लिए सफेद हाथी बन रहा। इसे निखारने के नाम पर परिषद अब तक करीब आठ करोड़ रुपए पानी में डूबा चुकी है। फिर तालाब डम्पिंग यार्ड का दंश झेल रहा। गांधी सागर तालाब में गंदगी का अम्बार लगा और गंदा पानी इसमें मिल रहा।

परिषद ने तालाब को उदयपुर की फतहसागर झील की तर्ज पर विकसित करने का दावा किया था। हकीकत यह है कि गंदे नाले सरीखा दिखाई देता है। चारों तरफ गंदगी फैली है। तालाब से निकलने वाले गंदा पानी की निकासी के स्थान पर हजारों टन प्लास्टिक थैलिया भरी पड़ी है। बंधे में भी गंदा पानी भरा पड़ा है। तालाब में आसपास की कॉलोनियों का गंदा पानी आ रहा है। इसे रोकने के लिए परिषद अब तक कोई ठोस योजना हाथ में नहीं ले पाया।

हर बोर्ड में खर्च हुए करोड़ों रुपए, समाधान के नाम पर कुछ नहीं
नगर परिषद में हर बोर्ड बैठक में इसके सौन्दर्य पर करोड़ों रुपए खर्च करने के प्रस्ताव लिए गए। गांधीसागर तालाब का सौन्दर्यकरण तो नहीं हुआ लेकिन इसके नाम पर जनप्रतिनिधियों और अफसरों ने अपनी जेबें जरूर भरी। 1995 से लेकर अब तक 8 करोड़ से अधिक की राशि गांधी सागर के सौंदर्यकरण पर खर्च की जा चुकी। इसके बावजूद भाजपा बोर्ड पांच करोड़ और खर्च करने की तैयारी कर रही है। यह राशि तालाब की सफाई, आईलैंड का विकास, फाउंटेन व सौंदर्यीकरण के नाम गिनाई जा रही है।जबकि हकीकत यह है कि तालाब में गंदे पानी के नाले आने से नहीं रूक रहे। इस समय गांधी सागर में सात नाले आकर गिर रहे है। एनजीटी भी इसे लेकर कई बार निर्देश दे चुका है लेकिन परिषद ने कोई परवाह नहीं दिखाई।

एनजीटी में लगाई थी याचिका
पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू ने गांधी सागर तालाब में गंदगी, प्लास्टिक थैलिया होने तथा शहर के सात गंदे नाले आकर इसमें मिलने के मामले को लेकर एनजीटी में जनहित याचिका लगाई थी। इसमें न्यायालय ने सफाई करने के आदेश दिए थे। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब भी नालों का पानी आकर इसमें मिल रहा है। लाखों रुपए की लगाई लोहे की जालियां चोरी हो गई। लाखों रुपए खर्च कर करौली का लगाया गया पत्थर टूट चुका है। इसके चारों तरफ अतिक्रमण की भरमार है।