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संस्कारों की धरा भीलवाड़ा: बालक सक्षम का सम्यकत्व वर्धन, आदिनाथ मंदिर में रत्नवृष्टि

गाजे-बाजे के साथ निकला जुलूस, स्वर्ण कलश से किया प्रथम अभिषेक

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Bhilwara, the land of values: Empowerment of child Saksham, shower of gems in Adinath temple

संस्कारों की धरा भीलवाड़ा: बालक सक्षम का सम्यकत्व वर्धन, आदिनाथ मंदिर में रत्नवृष्टि

वस्त्रनगरी भीलवाड़ा में धर्म और संस्कारों का अनूठा संगम देखने को मिला। निर्यापक मुनि पुंगव श्री सुधासागर जी महाराज की पावन प्रेरणा से संस्कारों की जो पौध वर्ष 2016 में रोपी गई थी, वह आज एक विशाल वटवृक्ष बन चुकी है। इसी श्रृंखला में आज आर.सी. व्यास कॉलोनी निवासी बालक सक्षम झांझरी का 'सम्यकत्ववर्धन' संस्कार बड़े ही हर्षोल्लास और भव्यता के साथ संपन्न हुआ।

भक्तिमय जुलूस और भव्य स्वागत

कार्यक्रम का शुभारंभ आर.सी. व्यास स्थित झांझरी निवास से हुआ। प्रेमबाई के पड़पौत्र तथा महावीर-सरिता झांझरी के पौत्र, 8 वर्षीय सक्षम को गाजे-बाजे और बैंड-वादन के साथ एक भव्य जुलूस के रूप में आर.के. कॉलोनी स्थित श्री आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर लाया गया।जैसे ही जुलूस मंदिर द्वार पर पहुँचा, वहाँ मौजूद समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों नरेश गोधा अध्यक्ष, राजकुमार सेठी, अजय टोंग्या एवं अन्य गणमान्य श्रेष्ठीजन ने परिवार का आत्मीय स्वागत किया।

अभिषेक और शांतिधारा का पुण्य लाभ

मंदिर परिसर में पहुँचकर बालक सक्षम ने पारंपरिक मर्यादा के अनुसार वस्त्र परिवर्तन किया। इसके पश्चात, अपने पिता सचिन झांझरी के साथ मिलकर उन्होंने मूलनायक भगवान आदिनाथ की प्रतिमा पर स्वर्ण कलश से प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य प्राप्त किया। भक्तिमय वातावरण के बीच 108 रिद्धि मंत्रों के उच्चारण के साथ भव्य अभिषेक संपन्न हुआ। सक्षम ने अत्यंत श्रद्धा के साथ स्वर्ण झारी से शांतिधारा की, जिससे पूरा मंदिर परिसर मंत्रों की ध्वनि से गुंजायमान हो उठा।

सम्यकत्व वर्धन क्रिया एवं रत्नवृष्टि

जैन धर्म में 8 वर्ष की आयु बालक के आध्यात्मिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी उपलक्ष्य में सुरेन्द्र गोधा एवं महेन्द्र सेठी ने सक्षम के मस्तक पर मांगलिक क्रियाएं करते हुए 'सम्यकत्ववर्धन' संस्कार संपन्न कराया। इस मांगलिक अवसर पर खुशी व्यक्त करते हुए झांझरी परिवार एवं उपस्थित परिजनों द्वारा मंदिर जी में रत्नवृष्टि की गई।

संस्कारों की जननी: भीलवाड़ा की धरा

उल्लेखनीय है कि बालक की आठ वर्ष की आयु में सम्यकत्व वर्धन क्रिया की शुरुआत सबसे पहले भारत में भीलवाड़ा के इसी आदिनाथ मंदिर से वर्ष 2016 में हुई थी। मुनि श्री सुधासागर जी महाराज की इस प्रेरणा ने आज पूरे देश के जैन समाज को एक नई दिशा दी है, जिससे नई पीढ़ी जुड़ाव महसूस कर रही है।