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भीलवाड़ा यूआईटी पराई लैब के भरोसे

Bhilwara UIT relying on Parai Lab अपनी लैब होने के बावजूद नगर विकास न्यास निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच पराई लैब से करा रहा है। लैब संभालने वाले कनिष्ठ अभियंता का तबादला होने के बाद यहां दो माह से ताला लगा है।

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Bhilwara UIT relying on Parai Lab

Bhilwara UIT relying on Parai Lab

भीलवाड़ा। अपनी लैब होने के बावजूद नगर विकास न्यास निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच पराई लैब से करा रहा है। लैब संभालने वाले कनिष्ठ अभियंता का तबादला होने के बाद यहां दो माह से ताला लगा है। Bhilwara UIT relying on Parai Lab

वस्त्रनगरी के सौंदर्यीकरण एवं विकास का जिम्मा जिले की सबसे बड़ी नगरीय विकास संस्था नगर विकास न्यास संभाले है। लेकिन न्यास की ही कार्य शैली विवादों में है। राजनीतिक दबाव बना होने से कई मामलों में शिकायतें होने पर जिला कलक्टर ने जांच तक बैठा रखी है। अब न्यास की पेराफेरी क्षेत्र में हो रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे है।

दीपावली पर दर्जनों पेचवर्क
कोरोना संकट काल होने के न्यास ट्रस्ट की बहु प्रतिक्षित बैठक नहीं होने से अभी शहर में निर्माण कार्यों को गति नहीं मिल सकी है, लेकिन शहर में दीपावली पर दर्जनों स्थलों पर पेचवर्क समेत कई निर्माण कार्य होने के बावजूद प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता की जांच के लिए न्यास की अपनी लैब बंद है। नियमित जांचें नहीं होने से निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की जांच परख विभागीय स्तर पर नहीं हो पा रही है। हालांकि न्यास का दावा है कि निर्माण कार्यों की सैम्पल की जांच पी डब्ल्यूडी व अन्य सक्षम लैबों से कराई जा रही है।

न्यास से पांच किमी दूर लैब
न्यास ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए तिलकनगर में प्रयोगशाला स्थापित कर रखी है। जो कि न्यास कार्यालय से करीब पांच किमी दूर है। यहां कनिष्ठ अभियता व स्टाफ की तैनाती है, लेकिन लैब की जिम्मेदारी संभाल रहे कनिष्ठ अभियंता लोकेश चंदौरा के तबादले के बाद ये यहां जांच नहीं हो रही है। यहां की जिम्मेदारी जरूर कागजों में कनिष्ठ अभियंता रुचि अग्रवाल के नाम है।

अभियंता की मौजूदगी में ही सेम्पल
नियमानुसार न्यास पेराफेरी में हो रहे सीसी रोड, नाले व नालियां निर्माण व सड़क डामरीकरण में प्रयुक्त सामग्री की गुणवत्ता की जांच के लिए नियमित रूप से सक्षम अभियंता की मौजूदगी में सेम्पल लेना जरुरी है, लेकिन अधिकांश निर्माण कार्य ठेकेदारों की मनमर्जी से हो रहे है। कई अभियंताओं की नजर तो निर्माण कार्य के बिल पेश होने पर ही गुणवत्ता की जांच रिपोर्ट पर पड़ती है।

यह है जांच का मापदंड
50 लाख की लागत से अधिक के निर्माण कार्यों की जांच निजी लैब में भी कराई जा सकती है, लेकिन इससे कम लागत के निर्माण कार्य न्यास की ही लैब में कराया जाना जरूरी है, इसके बावजूद लम्बे समय से अधिकांश लैब रिपोर्ट जुगाड़ के जरिए ही तैयार की जा रही है। शहर में निर्माण कार्यो की नियमित जांच कर सेम्पल लिए जाए तो 100 से अधिक सेम्पल लैब में आ सकते है

सब कुछ गोलमाल
नियमानुसार सीसी की जांच के लिए सेम्पल के क्यूब को 28 दिन तक पानी के टैंक में रखना जरुरी होता है, लेकिन शिकायत है कि ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। अत्याधुनिक जांच उपकरणों का भी यहां टोटा है। प्रशिक्षित कर्मियों के अभाव में जांच पर भी संदेह रहता है।

लैब के उपकरण खराब
पेचवर्क समेत विभिन्न निर्माण कार्यों में प्रयुक्त सामग्री की जांच लैब के जरिए ही होती है। लैब में कुछ उपकरण खराब होने से इन दिनों यहां जांच नहीं हो रही है, पीडबल्यूडी लैब की मदद ली जा रही है। लैब रिपोर्ट के बिना भुगतान संभव नहीं है।
पवन नुवाल, अधिशासी अभियंता एवं लैब प्रभारी, यूआईटी