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निर्यातकों को वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन बड़ी राहत: रोडटेप योजना 6 महीने के लिए बढ़ी

30 सितम्बर 2026 तक मिलता रहेगा योजना का लाभ, दरें और शर्तें यथावत

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Major Relief for Exporters on the Last Day of the Financial Year: RoDTEP Scheme Extended for 6 Months

निर्यातकों को वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन बड़ी राहत: रोडटेप योजना 6 महीने के लिए बढ़ी

वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंतिम दिन केंद्र सरकार ने देश भर के निर्यातकों को बड़ी राहत दी है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और करों की छूट रोडटेप योजना को आगामी छह महीने के लिए बढ़ा दिया है। यह योजना 30 सितम्बर 2026 तक लागू रहेगी। इस फैसले से भीलवाड़ा के कपड़ा उद्योग सहित प्रदेश और देश के तमाम निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने में मदद मिलेगी।

विदेश व्यापार महानिदेशक लव अग्रवाल की ओर से 31 मार्च 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार योजना को 1 अप्रेल 2026 से आगे बढ़ाते हुए यह निर्णय किया है। हालांकि इस योजना को 31 मार्च 2026 को समाप्त कर नई योजना को एक अप्रेल से लागू किया जा रहा था, लेकिन उसमें मिलने वाली छुट में कटौती की जा रही थी। इसे लेकर निर्यातक असमंजस में थे और इसके विस्तार की मांग कर रहे थे।

पुरानी दरों पर ही मिलता रहेगा रिफंड

सरकार ने स्पष्ट किया है कि योजना के तहत मिलने वाली छूट की दरों और वैल्यू कैप्स में कोई बदलाव नहीं किया है। 31 मार्च 2026 तक जो दरें लागू थीं, वही दरें 1 अप्रेल से 30 सितंबर 2026 की अवधि के दौरान किए गए निर्यात पर भी प्रभावी रहेंगी।

निर्यातकों के लिए अहम है यह योजना

रोडटेप योजना के तहत निर्यातकों को उन केंद्रीय, राज्य और स्थानीय करों या शुल्क का रिफंड मिलता है, जिनकी भरपाई किसी अन्य योजना के तहत नहीं होती है। इनमें मंडी टैक्स, वैट, कोयला उपकर और परिवहन पर लगने वाले कर शामिल हैं। इस योजना के निरंतर रहने से निर्यातकों की लागत कम होती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उनके उत्पाद सस्ते और प्रतिस्पर्धी बनते हैं।

यह है खास बात

  • छह महीने का विस्तार: सभी पात्र निर्यात उत्पादों के लिए रोडटेप योजना अब 1 अप्रेल से 30 सितम्बर 2026 तक जारी रहेगी।
  • दरें स्थिर: परिशिष्ट 4आर और 4 आरई में अधिसूचित दरें और वैल्यू कैप 31 मार्च 2026 के समान ही रहेंगे।
  • अधिसूचना जारी: यह आदेश विदेश व्यापार (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1992 की धारा 5 के तहत वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी किया गया है।
  • उद्योगों को संबल: इस कदम से कपड़ा, इंजीनियरिंग, कृषि और रत्न-आभूषण जैसे प्रमुख निर्यात क्षेत्रों को सीधा फायदा पहुंचेगा।