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भव्यता के फेर में अंधा मोड़ बना गोल प्याऊ चौराहा

80 लाख के प्रोजेक्ट में नियमों को किया दरकिनार, सामने से आने वाले वाहन नहीं आते नजर, हर पल मंडराता है हादसे का अंदेशा

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Gol Pyaau Square has become a blind turn in the pursuit of grandeur.

भव्यता के फेर में अंधा मोड़ बना गोल प्याऊ चौराहा

भीलवाड़ा शहर के सौंदर्यीकरण और महापुरुषों के सम्मान के नाम पर नगर निगम की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शहर के सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण गोल प्याऊ चौराहे पर स्थापित किए जा रहे महाराणा प्रताप सर्कल को भव्य बनाने की होड़ में निगम के तकनीकी विशेषज्ञों ने यातायात सुरक्षा के बुनियादी नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया है। सर्कल के बेस (चबूतरे) की ऊंचाई इतनी अधिक कर दी गई है कि यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों को सामने से आ रहा ट्रैफिक नजर ही नहीं आता। यह चौराहा अब एक 'ब्लाइंडस्पॉट' में तब्दील हो गया है, जहां हर पल बड़ी दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है। विडंबना यह है कि इसी चौराहे पर पूर्व में एक ट्रेलर की चपेट में आने से एक युवक की मौत हो चुकी है, लेकिन निगम प्रशासन ने इस हृदयविदारक घटना से कोई सबक नहीं लिया।ं

80 लाख का बजट: ढांचा तैयार, प्रतिमा का इंतजार

नगर निगम की योजना के तहत गोल प्याऊ चौराहे के कायाकल्प पर करीब 80 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं। प्रोजेक्ट के अनुसार: 30 लाख रुपए: सर्कल के सिविल कार्य और सौंदर्यीकरण पर व्यय। 50 लाख रुपए: हाथी पर सवार वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की भव्य प्रतिमा के निर्माण व स्थापना पर खर्च। निगम ने कार्यादेश जारी कर चबूतरे का निर्माण तो करवा लिया है, लेकिन प्रतिमा स्थापना अभी शेष है।

अभी यह हाल, तो प्रतिमा लगने के बाद क्या होगा?

क्षेत्रवासियों और वाहन चालकों में निगम की इस 'अजीब' इंजीनियरिंग को लेकर गहरा रोष है। लोगों का तर्क है कि बिना प्रतिमा के ही चबूतरे की ऊंचाई इतनी है कि विपरीत दिशा का वाहन ओझल हो जाता है। ऐसे में जब इस ऊंचे बेस पर विशालकाय हाथी और उस पर सवार महाराणा प्रताप की प्रतिमा स्थापित होगी, तो दृश्यता शून्य हो जाएगी। शहर के सबसे व्यस्ततम मार्गों में से एक होने के कारण यहां चारों तरफ से ट्रैफिक का भारी दबाव रहता है, जिससे यह निर्माण 'सुंदरता' कम और 'खतरा' ज्यादा नजर आ रहा है।

इंजीनियरिंग पर सवाल:आईआरसी नियमों की अनदेखी

यातायात नियमों के अनुसार किसी भी चौराहे के मध्य में निर्माण की ऊंचाई इस तरह होनी चाहिए कि चालक को कम से कम 50-70 मीटर दूर से सामने वाला वाहन स्पष्ट दिखे। गोल प्याऊ पर इस नियम की धज्जियां उड़ाई गई हैं।

परेशानी है तो सर्वे करवाएंगे

गोल प्याऊ चौराहे पर सर्कल का निर्माण शहर के सौंदर्यीकरण और महापुरुषों के सम्मान के विजन के तहत किया जा रहा है। आमजन की सुरक्षा निगम की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि सर्कल की ऊंचाई के कारण वाहन चालकों को विजिबिलिटी की समस्या आ रही है या दुर्घटना का अंदेशा है, तो मामले की जांच करवाकर तकनीकी सुधार करवाया जाएगा।

- हेमाराम चौधरी, आयुक्त, नगर निगम