
भीलवाड़ा की कनेक्टिविटी सुगम करना ही बड़ा विजन, लेकिन सरकार का साथ नहीं मिल रहा
कानाराम मुण्डियार
भीलवाड़ा.
टेक्सटाइल सिटी भीलवाड़ा में बड़ी परेशानी रेलवे लाइन के दोनों तरफ की बसावट के लिए सुगम कनेक्टिविटी नहीं होना है। नगर विकास न्यास के गठन को भी पचास साल से अधिक समय हो चुका है। शहरी सरकार यानि निकाय चुनाव में हर बार जनता को लुभाने के लिए वादे किए जाते रहे, लेकिन शहर को सुगम राह नहीं मिली। वर्तमान नगर परिषद बोर्ड के गठन को भी 18 माह का समय हो चुका है, लेकिन बोर्ड की स्थिति डांवाडोल नजर आ रही है। बोर्ड को न तो नगर विकास न्यास सहयोग मिल रहा है और न ही राज्य सरकार की ओर से कोई विशेष बजट मिल रहा है। ऐसे में शहर का विकास थमा सा नजर आ रहा है।
आखिर भीलवाड़ा शहर के ऐसे हालात क्यों हैं। ऐसे क्या प्रयास किए जाने चाहिए, जिससे भीलवाड़ा की तस्वीर बदल सकती है। शहर के ज्वलंत मुद्दों को लेकर राजस्थान पत्रिका ने शहर के प्रथम नागरिक यानि नगर परिषद के सभापति राकेश पाठक से बातचीत की। उन्होंने खुलकर अपनी पीड़ा व्यक्त की।
पेश है बातचीत के प्रमुख अंश-
सवाल: नगर परिषद में नए बोर्ड के गठन के समय आपने जो कौनसा बड़ा विजन निर्धारित किया, उसकी प्रगति का क्या रहा?
जवाब: बोर्ड गठन के साथ ही शहर में दोगुने विकास का विजन तैयार किया। रेलवे लाइन के पार सुगम कनेक्टिविटी के लिए अजमेर पुलिया को चौड़ा करना एवं अंडरपास विस्तार की योजना प्रस्तावित की, लेकिन यूआईटी व राज्य सरकार से आशातीत बजट में सहयोग नहीं मिल रहा है। इसलिए दोनों योजनाएं आगे नहीं बढ़ी।
सवाल : बोर्ड के 18 माह में जनता के हित में कौनसा बड़ा कार्य किया ?
जवाब : विकास को लेकर पूरे प्रयास किए हैं। शहर को सुंदर बनाने के प्रयास किए गए। सीवरेज से टूटी सड़कों के कारण सुंदरता नहीं दिख रही, लेकिन अब सड़कों का काम शुरू होने से राहत मिलेगी।
सवाल : आगामी तीन साल में शहर में क्या बड़े कार्य करवाएंगे?
जवाब : रेलवे पटरी के चलते दो भागों में बंटे शहर की ट्रेफिक व्यवस्था में सुधार, कनेक्टिविटी को लेकर पुल निर्माण व सड़क चौड़ी कराने पर विशेष फोकस रहेगा। आमजन व पार्षदों के सुझाव के अनुसार प्रयास किए जाएंगे।
सवाल : आमजन की पीड़ा हैं कि नगर परिषद में उनकी सुनवाई नहीं हो रही। सिस्टम में कहां पर खामी है। बोर्ड की जवाबदेही क्या है?
जवाब : शहरों की सड़कें सुधारने का काम शुरू कर दिया है। सीवरेज के कारण भी परेशानी हो रही है। फिर भी पहले जहां परेशानी ज्यादा है, वहां पेचवर्क के बाद नवनिर्माण किया जा रहा है।
सवाल : यूआईटी व नगर परिषद बोर्ड के बीच समन्वय कैसे हो सकता है, जिससे जनता को राहत मिल सके।
जवाब : यूआईटी में चेयरमैन पद पर राजनैतिक नियुक्ति नहीं होने से बड़ी परेशानी हो रही है। अफसरों के साथ बोर्ड का समन्वय संभव नहीं हैं। अफसर जनता की सुनने की बजाय अपनी मनमर्जी से काम कर रहे हैं?
सवाल : 7 करोड़ की आर्ट गैलरी का काम अटकने के पीछे क्या कारण है ?
जवाब : आर्ट गैलरी बड़ा प्रोजेक्ट हैं। इसके लिए निविदा प्रक्रिया पूरी कर कार्यादेश भी दे दिए गए थे। लेकिन ठेका फर्म ने कार्य शुरू नहीं किया। देरी को लेकर ठेकेदार के खिलाफ नोटिस कार्रवाई की गई है। ब्लैक लिस्ट करेंगे। कार्य के लिए निविदा दुबारा करेंगे।
Published on:
29 Sept 2022 08:50 pm
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