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हमारे तालाबों में रौनक बरकरार, लुभा रही विदेशी परिंदों की अठखेलियां

पानी से आसमां तक कलाबाजियां दिखा रहे देसी-विदेशी पक्षी

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Birds acrobatics in bhilwara

Birds acrobatics in bhilwara



भीलवाड़ा. जिले चावंडिया व गुरलां तालाब ही नहीं बल्कि नमी वाले क्षेत्र के तालाब में भी देसी-विदेशी पक्षी डेरा डाले हैं। यहां दिनभर इनकी अठखेलियां नजर आती है। तालाबों में रौनक रहती है। वहीं सुबह से शाम तक आसमान में भी कलाबाजी दिखा रहे हैं।


चांवडिया व गुरलां तालाब व अन्य तालाबों में भी विदेशी पक्षी यानी पावणे आने लगे हैं। इन देसी-विदेशी पक्षियों ने तालाब, पोखरों और झील को ठिकाना बना लिया है। ये पक्षी हजारों मील की उड़ान तय कर यहां आए हैं। यहां सुबह से विदेशी पङ्क्षरदे पानी में अठखेलियां करते दिखे। इन पक्षियों में बार हैडेड गूज, आईविश, रूडी शेल डक, कॉमन पोचार्ड, स्पून डील, पुस्पेड डक, पोचार्ड, गूज और विजिङ्क्षटग डक शामिल हैं। ये पक्षी चार महीने यहां रहते हैं। मार्च के अंत में घरों को लौट जाते हैं। कई देशों में पारा कम होने के कारण हर साल सर्दियों में विदेशी पक्षी हमारे यहां आने लगते हैं। अब शहर में भी कई तालाबों में देसी-विदेशी पक्षियों के झुंड देखे जाने लगे हैं।

नमी वाली जगह पहली पसंद
जिले में सर्वाधिक नमी वाले क्षेत्र है, इसलिए विदेशी परिदे यहां ज्यादा आना और रहना पसंद करते हैं। यहां पक्षियों को नमी के साथ भोजन भी मिलता है।


यहां से आते हैं
मुख्यत: मध्य यूरोप, रूस, कजाकिस्तान, मंगोलिया और हिमालय के तराई क्षेत्र से रडी शॅलडक (सुर्खाब), शॉवलर्स और कॉमन पॉचार्ड आदि पहुंचते हैं। ये स्थानीय पक्षियों के साथ अभी इन तालाबों में आशियाना बनाए हुए हैं। शाहपुरा के पीवणिया तालाब व जहाजपुर क्षेत्र के तालाब में भी बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं। इनका अभी तक यहां रूके रहना पक्षीप्रेमियों को लुभा रहा है।


रास आती है यहां की आबोहवा
&दिलचस्प यह है कि प्रवासी पक्षियों को यहां का मौसम रास आता है। यहां जलाशय प्रदूषण मुक्त व मानवीय गतिविधियों से दूर है। इसी वजह से यहां प्रवासी पङ्क्षरदों की अधिकता देखी जा रही थी। जिले के जलाशय इन पङ्क्षरदों के लिए और अधिक मुफीद साबित हो रहे हैं। पक्षियों के इस प्राकृतिक आवास न प्रदूषित करें और न ही अपने हित के लिए नष्ट या नुकसान पहुंचाएं। चावंडिया में सप्ताहांत में लोगों का मेला लगा रहता हैं। लोग यहां पक्षियों को निहारने के साथ कमरे में कैद कर रहे हैं।
- शुभम ओझा, सचिव, बर्ड कंजरवेशन सोयायटी, चावंडिया