
Education department's 'kindness', tenure over, ACBEO II still holds the chair
प्रदेश के शिक्षा विभाग में इन दिनों नियमों से ज्यादा 'जुगाड़' और 'रसूख' हावी दिख रहा है। राज्य के विभिन्न ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में कार्यरत अतिरिक्त ब्लॉक शिक्षा अधिकारी द्वितीय का चार साल का प्रतिनियुक्ति कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद वे अपने पदों पर कुंडली जमाए बैठे हैं। हैरत की बात यह है कि विभाग ने इन पदों के लिए नवीन साक्षात्कार की प्रक्रिया भी पूरी कर ली है, लेकिन चयनित अभ्यर्थी नियुक्ति के इंतजार में हैं और पुराने अधिकारी हटने का नाम नहीं ले रहे।
एक ओर जहां माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं नजदीक हैं, वहीं दूसरी ओर प्रदेश के सैकड़ों राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों में प्राचार्यों के पद रिक्त चल रहे हैं। विभाग ने हाल ही बड़े स्तर पर तबादला सूचियां जारी कीं, लेकिन इन कार्यमुक्त होने वाले एसीबीईओ को स्कूलों में भेजने की जहमत नहीं उठाई गई। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि कार्यकाल पूर्ण कर चुके इन अधिकारियों को मूल पदस्थापन (स्कूलों) में भेज दिया जाता, तो बोर्ड परीक्षाओं के सुचारू संचालन में बड़ी मदद मिलती।
इन अधिकारियों को विशेष प्रोजेक्ट्स के आधार पर प्रतिनियुक्ति पर लिया गया था। नियमानुसार 4 वर्ष की अवधि पूर्ण होते ही इन्हें मूल विभाग या पद पर लौटना था। शिक्षा विभाग के गलियारों में चर्चा है कि विभाग के कुछ उच्चाधिकारी अपने 'चहेतों' को इन मलाईदार पदों से हटाना नहीं चाहते। यही कारण है कि नई चयन सूची तैयार होने के बावजूद उसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
एक अभ्यर्थी ने बताया कि जब इंटरव्यू हो चुके हैं और पुराने अधिकारियों का समय पूरा हो चुका है, तो उन्हें कार्यमुक्त करने में देरी क्यों? स्कूलों में मॉनिटरिंग के लिए प्राचार्यों की सख्त जरूरत है। सवाल यह है कि शिक्षा मंत्री और विभाग के आला अधिकारी इस 'डेलीगेशन' के खेल को खत्म कर नए चेहरों को मौका देंगे या फिर व्यवस्था इसी तरह रसूख के साये में चलती रहेगी। भीलवाड़ा जिले में भी तीन ब्लॉक में अतिरिक्त ब्लॉक शिक्षा अधिकारी द्वितीय कार्य कर रहे है।
Published on:
15 Jan 2026 11:04 am

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