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BJP नेता ने अपनी पार्टी के नेतृत्व पर उठाए सवाल, कहा- निकाय चुनाव परिणाम जनता की भाजपा काे चेतावनी

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं शाहपुरा से भाजपा विधायक कैलाश मेघवाल ने विधानसभा के दो उपचुनाव एवं नगर निकाय चुनाव में भाजपा की स्थिति पर चिंता जताते हुए पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं।

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शाहपुरा (भीलवाड़ा)। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष एवं शाहपुरा से भाजपा विधायक कैलाश मेघवाल ने विधानसभा के दो उपचुनाव एवं नगर निकाय चुनाव में भाजपा की स्थिति पर चिंता जताते हुए पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं। मेघवाल ने बुधवार को पत्रकारों कहा, मैं पांच वर्ष विधानसभा अध्यक्ष रहा लेकिन इस दौरान कभी पार्टी की बुराई नहीं की। निकाय चुनाव में पार्टी की दुखद स्थिति देखकर भाजपा को इस विषय और पार्टी नेतृत्व पर गम्भीरता से विचार करना चाहिए।

बिना लीपापोती वास्तविक स्थिति कार्यकर्ताओं के सामने लानी चाहिए कि ऐसे हालात क्यों बन रहे हैं। पार्टी में गुटबाजी से भारी नुकसान हुआ है। आगामी दिनों में पंचायत राज व स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा की यह स्थिति न हो, इसके लिए पार्टी के शीर्ष नेताओं को सजग रहने की आवश्यकता है। मेघवाल ने स्पष्ट कहा कि चुनाव परिणाम जनता की भाजपा काे चेतावनी है। केंद्रीय नेतृत्व को जांच करवानी चाहिए। उन्हाेंने मंडावा विधानसभा उपचुनाव में एक दिन पहले कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुई सुनीता सीगड़ा को भी टिकट देने पर सवाल उठाए।

प्रदेश के निकाय चुनावों में कांग्रेस ने भारी बढ़त हांसिल की है। मंगलवार को जारी हुए चुनाव परिणामों में कांग्रेस ने 20 निकायों में स्पष्ट बहुमत ले लिया है। वहीं भाजपा को मात्र छह निकायों में संतोष करना पड़ा है। 23 निकाय ऐसे हैं, जहां निर्दलीय बहुमत का आंकड़ा पार कर रहे हैं। ऐसे में यहां यदि भाजपा या फिर कांग्रेस बोर्ड बनाते हैं तो उन्हें निर्दलीयों को साथ लेना होगा। इस जीत से कांग्रेस में उत्साह का माहौल है। वहीं भाजपा का उम्मीदवार के मुताबिक भी परिणाम नहीं मिले हैं। हालांकि कई निकायों में कांग्रेस व भाजपा बहुमत के आंकड़े के बहुत नजदीक है।

राज्य के 49 निकायों की मतगणना मंगलवार को हुई। शुरुआती रुझानों से ही कांग्रेस का पलड़ा भारी रहा। दोपहर तह सभी निकायों के नतीजे जारी हो गए। 49 निकायों में 3 नगर निगम, 18 नगर परिषद और 28 नगर पालिका शामिल हैं। उदयपुर नगर निगम में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला है, वहीं भरतपुर और बीकानेर में भाजपा का स्पष्ट बहुमत तो नहीं मिला, लेकिन सबसे बड़ा दल है। ऐसे में यहां भी निर्दलीय की महापौर बनाने में बड़ी भूमिका रहेगी। प्रदेश में गत कुछ वर्षों से यही परिपाटी चली आ रही है कि सत्ताधारी पार्टी को ही निकाय चुनावों में बढ़त मिल रही है। यह परिपाटी इस बार भी कायम रही है।