
Black earning from white gold in bhilwara
भीलवाड़ा।
Disturbances in cotton procurement सफेद सोने के नाम से मशहूर कपास की खरीद में बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है। खेतों से उपज आने के बाद किसानों को सही दाम दिलाने के लिए सरकार ने भारतीय कपास निगम को जिम्मेदारी दी है कि वे किसानों से सीधे माल खरीदकर उन्हें उपज का सही दाम दे। Disturbances in cotton procurement भीलवाड़ा मे उलटा हो रहा है। जिन कपास निगम अधिकारियों को यह काम सौंपा वे खुद ही यहां कपास फैक्ट्री मालिकों के साथ मिलकर गड़बड़ी का सौदा कर रहे हैं। इसमें किसान जो कपास लेकर आ रहे हैं उसे कम भावों में खरीदकर उन्हें नकद पैसे दिए जा रहे हैं। बाद में इसी कपास को निगम से जुड़े कर्मचारी कुछ किसानों के नाम से पंजीकृत कर बेच रहे हैं। इसका जो मुनाफा है वे मिलकर आपस में बांट रहे हैं। इस पूरे खेल को समझने के लिए राजस्थान पत्रिका ने लगातार दस दिन तक भारतीय कपास निगम के सेंटरों पर पड़ताल की। इसमें सामने आया कि किसानों से गिरदावरी व जमाबन्दी की नकल मांगी जा रही जो अनिवार्य भी नहीं है। इसके कारण नकद में कपास खरीदी जा रही है। इससे किसानों को उपज का समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा है।
ऐसे समझिए, कैसे हो रहा है खेल
किसान अपनी कपास में फैक्ट्रियों में लेकर आ रहे हैं। यहां पर निगम के कर्मचारी व फैक्ट्री के मालिक उसे समर्थन मूल्य पर खरीदने की बजाय नकद में खरीद रहे हैं। किसान भी जल्दबाजी के चक्कर में अपनी फसल को बेच रहे हैं लेकिन उन्हें नुकसान हो रहा है। अभी समर्थन मूल्य ५४५० है लेकिन किसान ४७००-४८०० में ही अपनी कपास बेच रहे हैं। बाद में कर्मचारी अन्य किसानों के दस्तावेज लगाकर उनके नाम से चेक कटवा रहे हैं ताकि उनको भी मुनाफा हो सके। यह खेल कई समय से चल रहा है।
यहां हो रही है कपास की खरीद
भारतीय कपास निगम अपने अधीन आने वाले भीलवाड़ा जिले के गंगापुर के सहाड़ा तथा कोटड़ी के सवाईपुर स्थित जिनिंग एवं प्रोसेसिंग फैक्ट्री को यार्ड बनाकर कपास की खरीद कर रही है।
यह भाव दे रही है सरकार
सरकार की ओर से कपास का सर्मथन मूल्य 5450 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है। सरकारी खरीद एजेंसी भारतीय कपास निगम जिले सहित अन्य आठ स्थानों पर कॉटन फैक्ट्रियों के साथ अनुबंध हैं और किसानों से सीधे कपास की खरीद की जा रही है। सीसीआई अधिकारी किसानों को लाभ पहुंचाने की बजाय मिलीभगत करके आढ़तियों व फैक्ट्री संचालकों को लाभ पहुंचा रहे है। जिसके चलते किसान अपना कपास समर्थन मूल्य से 400 से 600 रुपए प्रति क्विंटल कम में बेचने को मजबूर है। सरकार ने दर तय की है।
मंडी सचिव जारी करते किसानों की सूची
सीसीआई के अधिकारी बृजमोहन मीणा का कहना है कि फैक्ट्री परिसर में आने वाले किसानों की सूची गंगापुर कृषि उपज मंडी के सचिव एपीएमसी सर्टीफाइड सूची जारी करते है। उसके आधार पर ही किसानों से कपास की खरीद की जाती है। किसानों का भौतिक सत्यापन करने का काम भी मंडी सचिव का है।
सीसीआई अधिकारी दो दिन बाद देते सूची
मंडी सचिव कुलदीप मीणा का कहना है कि कपास खरीद में मंडी का कोई रोल नहीं है। सीसीआई ही कपास खरीदने के दूसरे या तीसरे दिन किसानों की सूची बनाकर देते है। उसी पर छाप लगाकर दे दी जाती है। किसानों का भौतिक सत्यापन करने का काम सीसीआई का है। कई बार तो सूची तीन दिन बाद आती है। जिस दिन कपास की खरीद होती उस दिन सूची नहीं देते है।
इन किसानों से नकद में खरीदी कपास
केस एक
कांदा निवासी किसान बालू गाडरी से सवाईपुर फैक्ट्री में ४७०० रुपए प्रति क्विंटल में कपास खरीदी। बालू को बताया कि जमाबंदी लाओ जबकि यह अनिवार्य नहीं है।
केस दो
सुवाणा निवासी किसान अरविन्द पोखरना ने बताया कि बिजयनगर फैक्ट्री में ४८०० रुपए प्रति क्विंटल में कपास बेची है। इन्हें भी दस्तावेजों के चक्कर में घुमाया गया।
फैक्ट्री मालिक खरीद सकते है
सीसीआई नकद में कपास नहीं खरीद रही है। फैक्ट्री मालिक नकद में खरीद रहा है तो उसमें निगम का कोई लेना देना नहीं है। निगम किसान को चैक के माध्यम से भुगतान कर रही है।
आध्येय मिश्रा, शाखा प्रबन्धक सीसीआई भीलवाड़ा
Published on:
05 Mar 2020 11:29 am
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