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अभियान समाप्त, नदियों में दौडऩे लगे बजरी के वाहन

जिले में बेखौफ माफिया : दिन-रात अवैध खनन शुरू

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Campaign ends, gravel vehicles started running in rivers in bhilwara

Campaign ends, gravel vehicles started running in rivers in bhilwara

सुरेश जैन
भीलवाड़ा।
जिले में नदियों के पेटे जेसीबी मशीनें खंगाल रही है। रोज हजारों टन बजरी इधर-उधर भेजी जा रही है। हालांकि खान विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को यह नजर नहीं आ रही। वे कह रहे हैं कि अवैध खनन नहीं हो रहा। अवैध बजरी बनास व कोठारी जैसी नदियों के अस्तित्व के लिए खतरा बन गया। कई जगह नदियों का वजूद ही खत्म होने लगा है। सीईसी कमेटी के दौरे को ध्यान में रखते इन क्षेत्रों में खनिज विभाग ने अभियान चलाकर काम रुकवा रखा था मगर कमेटी के जाने के बाद पुराने हालात लौट आए। चित्तौडग़ढ़ जिले के सिहाणा से लेकर भीलवाड़ा के हनुमानगर-जहाजपुर तक अनगिनत जगहों पर बनास नदी में बजरी माफिया की जेसीबी के निशान व बड़े गढ्डे अवैध खनन के हालात साफ बयां कर रहे हैं। मालूम हो, राज्य सरकार का अवैध बजरी खनन व परिवहन अभियान शनिवार को समाप्त हो गया।
जिले के जहाजपुर और कोटडी में केवल चार बजरी लीज है। चारों का क्षेत्रफल मात्र 5.75 हेक्टयर है। यहां पर बजरी माफिया ने अवैध खनन की वजह से स्थिति बेहद खराब कर दी। इन स्थलों का दौरा किए जाने पर अवैध खनन के लिए सबूत ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ती है। बड़े गढ्ढे सारी स्थिति बयां कर देते हैं। बड़े पैमाने पर अवैध खनन होने के बाद भी विभाग की नजर में सब कुछ बढिय़ा है। खनिज विभाग एवं बजरी माफिया के गठजोड़ का अंदाजा इससे लगा सकते हंै कि खातेदारी की चार लीज है लेकिन नदी के पास नहीं होने के बाद भी अवैध खनन जोरों पर है। लीज से निकाली बजरी की मात्रा भी मिलीभगत का नमूना है। खनन के लिए नदी किनारे के सैकड़ों हरे पेडों तक कटवा दिएा। बनास व कोठारी से प्रतिदिन हजारों टन बजरी निकल रही है। सीईसी ने जिले का नजारा अपनी आंखों से देख चुकी है।