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रोडवेज की तीसरी आंख को मोतियाबिंद

- बसों में सीसी कैमरे लगाने की कवायद नहीं हुई पूरी - लीकेज पर अंकुश और यात्रियों की सुरक्षा था उद्देश्य - जिन बसों में लगाए, वहां भी नहीं बचे
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भीलवाड़ा

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Akash Mathur

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Updated: 15 Dec 2022, 11:45 AM IST

रोडवेज की तीसरी आंख को मोतियाबिंद

रोडवेज की तीसरी आंख को मोतियाबिंद

रोडवेज प्रशासन का तीसरी आंख से अपनी बसों पर नजर रखने का सपना पूरा नहीं हुआ है। लीकेज पर अंकुश और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर हाथ में ली गई सीसी कैमरे लगाने की कवायद अधूरी ही रह गई। इसका बड़ा कारण रोडवेज प्रबंधन की अनदेखी है। इससे रोडवेज बसों में निगरानी का प्रबंधन के पास कोई तरीका नहीं रहा। राजस्थान में रोडवेज की बसों का पिछले लंबे समय से यही हाल है। जिन बसों में निगरानी के लिए कैमरे लगाए थे, वे भी गायब हो चुके हैं। प्रदेश में प्रायोगिक तौर पर जयपुर समेत कुछ आगार में इसकी शुरुआत हुई थी। भीलवाड़ा आगार में भी कुछ बसों में कैमरे लगाए थे, लेकिन अब बसों से कैमरे नदारद है।

इसलिए समझी जरूरत
रोडवेज ने करीब पांच साल पहले अपनी बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का काम हाथ में लिया था। राज्यभर में करीब 2500 रोडवेज बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए। इसके लिए मुख्यालय स्तर पर निजी कम्पनी को बसों में सीसीटीवी कैमरा लगाने और मॉनिटरिंग का जिम्मा सौंपा था। इसके पीछे दो मकसद थे। पहला-यात्रियों की सुरक्षा थी। विशेष तौर से महिला यात्रियों की सुरक्षा को पुख्ता करना था। बसों में महिला के अकेली यात्रा करने के दौरान असहज महसूस नहीं करें और बेखौफ होकर यात्रा कर सकें इसलिए कैमरे लगाए गए। दूसरा-घाटे से जूझते रोडवेज को अपनों के नुकसान पहुंचाने वाले नजर रखने व लीकेज रोकना था। बिना टिकट यात्रा करवाने वाले परिचालकों पर नजर रखने के लिए भी बसों में तीसरी आंख लगाई गई।

चार दिन निगरानी, फिर वही ढर्रा
कैमरे लगाए जाने के बाद कुछ माह तक तो रोडवेज बसों में निगरानी हुई। उसके बाद धीरे-धीरे हालात पुराने ढर्रे पर आ गए। स्थिति यह हो गई, जिन भी बसों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे वे सभी खराब पड़े हैं। कैमरों की मॉनिटरिंग के लिए अनुबंधित कम्पनी की ओर से लगाए कर्मचारी भी सही तरीके से काम नहीं कर पाए। ऐसे में योजना पर खर्च लाखों रुपए व्यर्थ चले गए।