
Catering of 28 lakh people by one inspector for one and a half years in bhilwara
सुरेश जैन
भीलवाड़ा।
पिछले डेढ़ साल से जिले की लगभग २८ लाख लोगों के खानपान की जांच मात्र एक खाद्य निरीक्षक के जिम्मे है। होली, दिवाली जैसे पर्व पर दुकानों से नमूने लेकर मिलावट के खिलाफ ठोस कार्रवाई भी नहीं हो पा रही है। जिले में लगभग ११ हजार खाद्य प्रतिष्ठान स्वास्थ्य विभाग में रजिस्ट्रर्ड है, लेकिन जांच के लिए मात्र एक निरीक्षक है।
जिले में छोटी-बड़ी दुकानों व कारखानों समेत लगभग ११ हजार दुकानें, कारखानें व होटल हैं। इनका सीधा जुड़ाव आम लोगों की सेहत से रहता है। टेक्सटाइल व खनिज उद्योग के चलते बाहरी लोगों का भी भीलवाड़ा आना जाना रहता है। लिहाजा ऐसे लोग बाहरी खाने पर निर्भर रहते हैं।
खाद्य निरीक्षक मिठाई के सैम्पल लेकर जांच के लिए अजमेर भेजते हैं। रिपोर्ट में ४५ दिन लगते है। तब तक दुकानों से मिठाई को बेच दिया जाता है।
समय कम प्रतिष्ठान अधिक
यहां ३०० से अधिक मिठाई की दुकानें है और निरीक्षक एक है। दूध की डेयरियां, आटा चक्की, ज्यूस की दुकानें, खाद्य सामग्री की फैक्ट्रियां आदि मिला दें तो संख्या ११ हजार पार हो जाएगी। ऐसे में अभियान के २० दिनों में सभी दुकानों की सैम्पलिंग, जांच और कार्रवाई होना मुमकिन नहीं है। जिले में दो खाद्य निरीक्षक, एक लिपिक और एक कम्प्यूटर ऑपरेटर का पद है। एक निरीक्षक और लिपिक ही कार्यरत है।
जिले में प्रतिष्ठानों की संख्या
-३०० मिठाई की दुकानें
-७० दूध डेयरी
-१०० खाद्य पदार्थ बनाने वाली फैक्ट्रियां
-३०० जूस की दुकानें
-५०० मावा निर्माता
-२५०० किराणा दुकानें
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कोर्ट के काम भी करने पड़ते
यहां दो खाद्य निरीक्षक के पद हैं, लेकिन अभी एक खाली है। अभियान चल रहा है, लेकिन सामान्य दिनों में कार्रवाई करना, सैम्पलिंग करवाना, कोर्ट की कार्रवाई आदि काम भी करने पड़ते हैं।
देवेन्द्रसिंह राणावत, खाद्य निरीक्षक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग
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निदेशालय को लिखा पत्र
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग निदेशालय को खाद्य निरीक्षक का एक पद रिक्त होने से खाद्य पदार्थों की जांच कम होने की वस्तु स्थिति से अवगत करवा रखा है।
डॉ. मुस्ताक खान, सीएमएचओ
Published on:
28 Oct 2020 11:22 pm
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