
cattles on the road in bhilwara
भीलवाड़ा।
नगर परिषद क्षेत्र में सड़कों पर घूम रहे आवारा मवेशी को लेकर जिला कलक्टर शुचि त्यागी ने नाराजगी जताई है। उन्होंने नगर परिषद, पशुपालन विभाग के अधिकारियों को बुलाकर समस्या का समाधान करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि इतनी गोशालाओं को अनुदान दिया जा रहा है, तो संचालक गायों को क्यों नहीं रखना चाहते हैं। इस संबंध में बुधवार को पशुपालन विभाग में सभी गोशाला संचालकों की बैठक भी होगी। इसमें गायों को वहां छोडऩे के संबंध में चर्चा की जाएगी।
उधर, परेशानी यह है कि नगर परिषद के कायन हाउस में अभी 429 गायें हैं। इससे पहले 200 गायें बाबा बालकनाथ अपनी गोशाला में ले गए। अब कोई भी गोशाला संचालक इन गायों को ले जाने के लिए तैयार नहीं है। इसके पीछे तर्क है कि गायों को रखने के लिए उनके पास जगह और सुविधाएं नहीं हैं। एेसे में शहर की सड़कों पर गायों का जमावड़ा रहता है। इससे आए दिन दुर्घटनाएं होती हैं।
एसडीएम ने भी किया तलब
गत दिनों भीलवाड़ा उपखंड अधिकारी ओमप्रभा ने शहर का दौरा किया था। इसमें सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे मिलने पर उन्होंने नाराजगी जताई। इसके बाद परिषद अधिकारियों को तलब भी किया, लेकिन समाधान नहीं निकला। उन्होंने सात दिन में कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन परिषद के अधिकारियों ने रुचि नहीं ली।
ये पांच काम हों तो मिले राहत
शहर की सड़कों पर जो भी आवारा मवेशी हैं उनके सींगों के रिफ्लेक्टर लगाए जाएं। स्वयंसेवी संगठन एेसा करें तो रात के समय दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है।
कई लोग दूध निकालने के बाद गायों को सड़कों पर छोड़ देते हैं। एेसी गायों को कायन हाउस में ले जाना जरूरी है। इसके लिए जुर्माना तय होना चाहिए।
शहर में प्रमुख चौराहों पर कई लोग चारा बेचते हैं। वहां मवेशियों का जमावड़ा रहता है। चारा बेचने वाले शहर में ही स्थित गोशाला के बाहर हो, ताकि पूरे शहर में गंदगी भी नहीं हो और दुर्घटना रुके।
शहर के आसपास जो गोशालाएं हैं, उनको 50 से 100 तक गायें दी जा सकती हैं। एेसा होगा तो कायन हाउस फिर खाली होगा। इसके बाद शहर से गायें और ले जाई जा सकेंगी।
आवारा मवेशियों के मामले में जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों को आगे आना चाहिए। वे कुछ आर्थिक मद करें तो समस्या से निजात मिल सकती है।
Published on:
29 Aug 2018 12:56 pm
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