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नहाय-खाय के साथ छठ पूजा का पर्व 17 से

भीलवाड़ा. बिहार व पूर्वांचल के लोगों का चार दिवसीय पारंपरिक पर्व डाला छठ शुक्रवार से नहाय खाय के साथ शुरू होगा।
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नहाय-खाय के साथ छठ पूजा का पर्व 17 से

नहाय-खाय के साथ छठ पूजा का पर्व 17 से

भीलवाड़ा. बिहार व पूर्वांचल के लोगों का चार दिवसीय पारंपरिक पर्व डाला छठ शुक्रवार से नहाय खाय के साथ शुरू होगा। 18 को खरना, 19 को डूबते सूर्य को अर्घ्य और 20 को उगते सूर्य को जल अर्पित कर व्रत संपन्न होगा।

मैथिल सेवा संस्थान अध्यक्ष संजय झा ने बताया, भीलवाड़ा में मुख्यत: मानसरोवर झील, वाटर वर्क्स, धांधोलाई, हरनी महादेव एवं कई अस्थायी कुंडों में पर्व मनाया जाता है। इसमें सूर्य और छठी मैय्या की पूजा की जाती है। निर्जला व्रत 36 घंटे का होता है। पहले दिन नहाय-खाय से शुरुआत होगी। व्रती शुद्ध जल से स्नान के बाद नए कपड़े पहनकर सात्विक भोजन करते हैं। इसके बाद घर के अन्य सदस्य भोजन करते हैं। खरना छठ को व्रती दिनभर निर्जला व्रत रखते हैं। शाम को चूल्हे पर गुड, दूध व चावल की खीर बनाकर केला, मिठाई आदि घर के पूजा स्थल को अर्पित करते हैं। उसी प्रसाद को खाने के बाद 36 घंटे की निर्जला व्रत शुरू होता है, जो उदयगामी सूर्य अर्घ्य के बाद समाप्त होता है।

छठ पूजा के दिन संध्या अर्घ्य का होता है। इस दिन व्रती प्रसाद बनाते हैं। घाट पर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। टोकरी यानी डाला में विभिन्न फल, जमीकंद, ठेकुआ, चावल के लड्डू, गन्ना, आदि डाला व सूप में सजाया जाता है। इसके बाद पानी में अर्घ्य दिया जाता है। पर्व के अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रत संपन्न होता है।

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