लोक आस्था के प्रसिद्ध पर्व डाला छठ मनाने के लिए दिन भर छठ प्रसाद बनाया गया। प्रसाद के रूप में ठेकुआ, जिसे कुछ क्षेत्रों में टिकरी भी कहते हैं। इसके अलावा चावल के लड्डू जिसे लड़ुआ और भूस्वा भी कहा जाता है, बनाते हैं। चढ़ावा के रूप में केला, सेव, अनार, पानी वाला नारियल, निम्बू, ईंख, सीताफल इत्यादि के अलावा सीजनल सब्जी में शकरकंद, सुथनी, पत्ते लगे हल्दी, मूली, सरकंद आदि की व्यवस्था कर बांस की बनी डाला सुप में सजा कर शाम को व्रती के साथ परिवार तथा पड़ोस के लोग अस्ताचलगामी सूर्य को अघ्र्य देने घाट की ओर जाते है। पूर्वांचल जन चेतना समिति ने नेहरू तलाई घाट पर अर्चना दुबे के नेतृत्व में श्रद्धालुओं का स्वागत किया। अपर जिला न्यायाधीश चन्द्रप्रकाश सिंह ने श्रद्धालुओं को पर्व की बधाई व सूर्यदेव को अध्र्य दिया। सचिव सुनील झा एवं संस्था संरक्षक नन्दकुमार सिंह ने श्रद्धालुओं का अभिनन्दन किया। कमलेश झा, कृष्णानन्द महाराज, अरूण राय, दयाराम यादव, राजेश गुप्ता, महेश चौधरी, सुधीर झा, अशोक मिश्रा, मुकेश चौधरी, मोनु दुबे, मधु श्रीवास्तव, संगीता देवी, विभा देवी, सुग्रीव यादव, धर्मेन्द्र भारती, जयन्ती देवी, रंजना झा आदि मौजूद थे।