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कपड़े का स्टॉक बढ़ा, उद्योग पर संकट के बादल

कोरोना लॉकडाउन का असरश्रमिक पलायन भी बड़ी समस्या
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भीलवाड़ा

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Suresh Jain

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Updated: 21 May 2021, 7:55 PM IST

कपड़े का स्टॉक बढ़ा, उद्योग पर संकट के बादल

कपड़े का स्टॉक बढ़ा, उद्योग पर संकट के बादल

भीलवाड़ा।
लॉकडाउन ने यहां टेक्सटाइल उद्योग पर फिर संकट ला दिया। जिले में लगभग २१ दिन से लॉकडाउन के बावजूद लगातार कपड़ा तैयार हो रहा है। अब स्थिति यह हो गई कि कपड़े का स्टॉक बढ़ता जा रहा है। लॉकडाउन के चलते कपड़े को खरीदार नहीं मिल रहे हैं। इससे उद्यमियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया। उद्यमियों के पास मजदूरों का पलायन रोकने व उद्योगों को चलाने के लिए कोई योजना नहीं है।
भीलवाड़ा टेक्सटाइल ट्रेड फेडरेशन ने वित्त मंत्री को पत्र लिखा। इसमें बताया कि भीलवाड़ा में 300 विविंग इकाइयों में से अधिकांश बंद है। 19 में से ६ प्रोसेस हाउस चल रहे हैं। 5 डेनिम प्लांट एवं 14 स्पिनिंग यूनिटें है। इनमें प्रत्यक्ष रूप से 70 हजार लोगों को रोजगार मिला है लेकिन अभी कई उद्योग बंद हैं या बंद होने के कगार पर हैं। भीलवाड़ा में प्रतिमाह आठ करोड़ मीटर कपड़ा बनता है। पिछले साल से उद्योगों के हालात ठीक नहीं है। भीलवाड़ा से लगभग 70 देशों को निर्यात के साथ देश की विभिन्न मंडियों में कपड़े जाता है। भीलवाड़ा मंडी से १८ हजार करोड़ का वार्षिक टर्नओवर है।
यह मिले राहत तो चले काम
भीलवाड़ा टेक्सटाइल ट्रेड फेडरेशन ने केंद्र सरकार से कोरोना के वस्त्र उद्योग को 10 प्रतिशत कोविड एमरजेंसी क्रेडिट लाइन एवं 20 प्रतिशत जीईसी एलएस स्कीम के तहत ऋण देकर उद्योगो को राहत दी। इस कारण उद्योगों ने उत्पादन पुन: शुरू किया लेकिन दूसरी लहर में देश की सभी कपड़ा मंडियां बंद हैं। भीलवाड़ा में कपड़े का उत्पादन जारी रहने के कारण व भुगतान नहीं आने, माल बाहर नहीं जाने से आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। गत वर्ष मिले दोनों अल्पकालीन ऋणों के पुनर्भुगतान की अवधि को बढ़ाई जाएं।
तरलता समाप्ति का असर
उत्पादन के कारण कपड़े का स्टॉक बढ़ रहा है। कच्चे माल की खरीद से तरलता समाप्त हो गई है। इसका प्रभाव कपड़ा उद्योग पर पडऩे लगा है। ऐसी स्थिति में आरबीआइ के माध्यम से प्रत्येक बैंक को गाइडलाइन जारी कराई जाए ताकि उत्पादकों को बढ़ते स्टॉक लेवल के लिए अल्पकालीन कार्यशील पूंजी की जरूरत पूरा की जा सके।पिछले साल केन्द्र सरकार ने उद्योगों के आर्थिक संकट को दूर करने के लिए मॉरिटोरियम पीरियड की घोषणा की थी। इससे उद्योगों को आर्थिक संकट से उबारने में राहत मिली थी। उद्यमियों की मांग है कि मॉरिटोरियम की घोषणा की जाए।
राहत की मांग
कोरोना की दूसरी लहर के कारण प्रदेश में लॉकडाउन है। फिर भी सरकार की मंशा के अनुसार श्रमिकों का पलायन नहीं हो, इस कारण उद्योगों में उत्पादन जारी है लेकिन अब चलाना संभव नहीं है। ऐसे में केद्र सरकार ने राहत की मांग की है।
अतुल शर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष, भीलवाड़ा टेक्सटाइल ट्रेड फेडरेशन